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Kaithal News: किताबें खरीदने के लिए बाध्य न करने के स्कूलों को निर्देश

Sun, 09 Apr 2023 12:33 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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कैथल। मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों द्वारा एक अनुशंसित स्टोर या दुकान से किताबें खरीदने के लिए अभिभावकों को बाध्य करने के मामले पर विभाग ने संज्ञान लिया है। इस संबंध में माध्यमिक शिक्षा निदेशालय की ओर से प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को लिखित आदेश जारी किए गए हैं कि वे अपने अधीनस्थ सभी निजी स्कूलों को निर्देश जारी करें कि कोई भी विद्यालय किसी भी विद्यार्थी को किताबें खरीदने के लिए बाध्य न करें।
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आदेशों में यह भी स्पष्ट कहा गया है कि कोई स्कूल किसी विद्यार्थी या अभिभावक को अनुशंसित दुकान से पुस्तकें, वर्दी, कार्य-पुस्तिकाएं, जूते या मौजे खरीदने के लिए बाध्य करता है तो उसके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाए।
गौरतलब है कि कई निजी स्कूलों द्वारा अभिभावकों को अनुशंसित स्थानों से किताबें खरीदने के लिए कहा जा रहा है। अमर उजाला समाचार पत्र में अभियान के तहत संबंधित समाचारों को प्रमुखता से प्रकाशित किया गया। कैथल की स्टूडेंट्स-पैरेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन ने भी इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। मुद्दे पर संज्ञान लेते हुए विभाग ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे संबंधित जिलों में मामले की जांच-पड़ताल करें।
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बस्ते तक अनुशंसित दुकानों से खरीदने के लिए किया जा रहा बाध्य : बात सिर्फ किताबों या स्टेशनरी तक ही समाप्त नहीं होती, कई निजी स्कूल तो बस्ते तक विद्यार्थियों और अभिभावकों पर जबरन थोप रहे हैं। ऐसे निजी स्कूल अभिभावकों के पास व्हाट्सएप और अन्य माध्यम से लिखित संदेश भेज रहे हैं कि वे संबंधित दुकानों से ही बच्चों की किताबें और वर्दी खरीदें। इन सबकी खरीदारी के लिए स्कूल बैग की खरीद अनिवार्य की गई है। अभिभावकों पर आदेश थोपे जा रहे हैं कि अगर वे संबंधित दुकान से बच्चों का बस्ता नहीं खरीदेंगे तो उन्हें किताबें भी नहीं मिलेंगी।
स्टूडेंट्स पैरेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के सचिव गुरमीत गुलाटी, कृष्ण कुमार, देवेंद्र सिंह, मंदीप व अनिल ने बताया कि ऐसा केवल एक या दो स्कूल नहीं कर रहे, बल्कि कई स्कूलों में ऐसे आदेश अभिभावकों पर थोपे जा रहे हैं। ऐसा करके अभिभावकों से मनमाने दाम वसूले जा रहे हैं। जिन कक्षाओं के लिए एनसीईआरटी की पुस्तकें 400 से 500 रुपये में मिल जाती हैं, उन कक्षाओं की निजी प्रकाशकों की पुस्तकों के दाम 4500 से लेकर 5000 के बीच हैं। अभिभावकों पर अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है। यही नहीं, अलग-अलग दुकानों पर दाम भी अलग-अलग लिए जा रहे हैं।
जिला शिक्षा अधिकारी रविंद्र चौधरी ने बताया कि विभाग के मुख्यालय से इस संबंध में लिखित आदेश आए हैं। सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देशों से अवगत करवाया गया है। साथ ही उन्हें स्कूलों पर निगरानी और संबंधित क्षेत्र के स्कूलों में पड़ताल के निर्देश दिए हैं। अगर कोई स्कूल नियमों अथवा आदेशों का पालन नहीं करता है तो उसके खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
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