कैथल। कैथल की वुशू कोच रीटा रानी अपनी बहन से प्रेरणा लेकर हजारों बेटियों को आत्मनिर्भर बना रही हैं। बचपन में जब उनकी बड़ी बहन कराटे सीखने जाती थीं तो उन्हें भी साथ जाने का शौक हुआ। यही शौक आगे चलकर जुनून में बदल गया और आज वह न केवल राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी रह चुकी हैं बल्कि सैकड़ों बेटियों के लिए प्रेरणा भी बनी हुई हैं।
रीटा रानी ने कराटे, किक बॉक्सिंग और मार्शल आर्ट में लगातार मेहनत की। उन्होंने कराटे में राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक, ताइक्वांडो में रजत पदक और वुशू में कांस्य पदक हासिल कर प्रतिभा का लोहा मनवाया। खेल के प्रति समर्पण को देखते हुए उन्होंने वुशू में एनआईएस डिप्लोमा किया और बाद में सरकार की ओर से निकाली गई भर्ती में वुशू कोच के पद पर चयनित हो गईं। वर्तमान में उनके मार्गदर्शन में 25 खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच चुके हैं, जबकि एक खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में देश का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। नौकरी मिलने से पहले भी उन्होंने हजारों लड़कियों को नि:शुल्क आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दिया।
घरों से बाहर निकल प्रतिभा का लोहा मनवाएं बेटियां
कोच रीटा का मानना है कि खेल केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं बल्कि आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता का रास्ता भी है। रीटा रानी कहती हैं कि जिस तरह उन्हें अपनी बहन से आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली, उसी तरह वह चाहती हैं कि उनकी कहानी और संघर्ष दूसरी बेटियों को अपने सपनों के लिए घरों से बाहर निकलने का हौसला दें। उनके लिए सबसे बड़ी उपलब्धि पदक नहीं बल्कि उन लड़कियों की सफलता है, जो खेल के जरिये अपनी पहचान बना रही हैं।
वुशू कोच रीटा रानी