संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। आरकेएसडी कॉलेज के उद्यमिता विकास क्लब ने उद्यमिता विकास पर एक दिवसीय सेमिनार आयोजित किया। इस अवसर पर स्वदेशी जागरण मंच कश्मीरी लाल मुख्य वक्ता रहे। उन्होंने कहा कि उद्यमिता एक व्यवसाय उद्यम की पहचान करने और उसे शुरू करने, आवश्यक संसाधनों को जुटाने और व्यवस्थित करने और उद्यम से जुड़े जोखिम और लाभ दोनों को उठाने की एक प्रक्रिया है।
उन्होंने कहा कि यह आर्थिक विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कारक है। स्वरोजगार के मुद्दे पर विचार करते हुए विकसित और विकासशील देशों में छात्रों की दर में वृद्धि हुई है। चाहे आप अपनी खुद की कंपनी शुरू करें या कॉरपोरेट सीढ़ी चढ़ने का विकल्प चुनें, हर समय उद्यमिता की भावना को बनाए रखना आवश्यक है। यह सिर्फ पैसा कमाने से कहीं ज्यादा है। यह मूल्य और विचारों को बनाने, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परिवर्तनीय नेतृत्व कौशल रखने और सांस्कृतिक विविधता के बारे में है।
कार्यक्रम में महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. बृजपाल मुख्य अतिथि रहे। सेमिनार के इस सत्र का उद्देश्य छात्रों को उद्यमिता की ओर प्रेरित करना था क्योंकि यह भविष्य की पीढ़ियों के लिए रोजगार पैदा कर सकता है। डॉ. ब्रिनपाल ने कहा कि यह सेमिनार उद्यमशीलता की अवधारणाओं के बारे में बुनियादी जागरूकता बढ़ाने और छात्रों को उद्यमिता को करियर के रूप में अपनाने के लिए मानसिकता बनाने और उसे पहचानने में सक्षम बनाने के लिए आयोजित किया गया था।
उन्होंने उद्यमिता की अवधारणा पर प्रकाश डाला और इससे संबंधित मिथकों और उद्यमिता के विभिन्न पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया जैसे: उद्यमी पैदा नहीं होते, उद्यमी एक आदर्श प्रोफ़ाइल के लिए उपयुक्त होते हैं, उद्यमी बनने के लिए आपको बस पैसे की आवश्यकता होती है, उद्यमी बनने के लिए आपको बस किस्मत की आवश्यकता होती है और दूसरा यह कि एक बढ़िया विचार ही व्यवसाय के लिए एकमात्र घटक है।
उन्होंने उल्लेख किया कि भारत जैसे देश में लोग अपने नए उद्यम शुरू नहीं करते हैं, इसका कारण भारत की आबादी में जागरूकता की कमी है और जोखिम को कम करने के लिए वे निजी या सरकारी क्षेत्र में नौकरी करने का फैसला करते हैं।
उन्होंने सफल उद्यमियों की विभिन्न विशेषताओं जैसे ड्राइव, संचार कौशल और तकनीकी कौशल के बारे में विस्तार से बताया। इस मौके पर प्रिंसिपल डॉ. संजय गोयल ने कहा कि इस तरह के व्याख्यान छात्रों को कड़ी मेहनत करने और पर्याप्त आगे की योजना और योजनाओं के निष्पादन के माध्यम से एक नया उद्यम शुरू करने के लिए प्रेरित करते हैं। सत्र एक इंटरेक्टिव था जहां छात्रों ने बहुत भागीदारी की और सवालों के जवाब जाने।
सेमिनार में लगभग 150 छात्रों ने भाग लिया। सेमिनार में प्रो. विशाल आनंद ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस अवसर पर डॉ. सूरज वालिया, डॉ. सुरेंद्र सिंह और कॉलेज के उद्यमिता विकास क्लब के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।