संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। बात्ता गांव में शनिार को राष्ट्रीय मानव तस्करी जागरूकता दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इसमें आधुनिक दासता के खिलाफ जागरूकता फैलाई गई। इस दिवस का लक्ष्य यौन तस्करी के अपराध से बचाव की जानकारी देना रहा।
कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास विभाग, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण व स्वास्थ्य विभाग के प्रतिनिधियों ने लोगों का मार्गदर्शन किया। संदीप राणा ने कहा कि 11 जनवरी को यह दिवस मनाया जाता है। हर साल दुनिया भर के संगठन समुदायों को सहायता प्रदान करते हैं, स्वयंसेवकों को प्रशिक्षण देते हैं और जागरूकता बढ़ाने के लिए शैक्षिक कार्यक्रम आयोजित करते हैं।
उन्होंने बताया कि मानव तस्करी एक ऐसे अपराध की ओर ध्यान आकर्षित करता है जो दुनिया भर में मानव जीवन, परिवारों और समुदायों पर गहरा प्रभाव डालता है। उन्होंने कहा कि मानव तस्करी को गुलामी का एक आधुनिक रूप माना जाता है। इस अवैध कृत्य में श्रम या यौन संबंध प्राप्त करने के लिए बल, धोखाधड़ी या जबरदस्ती का उपयोग शामिल है।
उन्होंने बताया कि यह दिन मानव तस्करी के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने और इसके खिलाफ संघर्ष के प्रति लोगों को संवेदनशील बनाने के लिए समर्पित है। दरअसल, तस्कर अपने पीडि़तों को तस्करी की स्थितियों में फंसाने के लिए हिंसा, हेरा फेरी या झूठे वादों का इस्तेमाल करते हैं। तस्करी के शिकार आमतौर पर शारीरिक और मनोवैज्ञानिक शोषण का सामना करते हैं। वे यौन शोषण, भोजन और नींद से वंचित, परिवार के सदस्यों को धमकियां और बाहरी दुनिया से अलगाव भी झेल सकते हैं।
पीडि़त के परिवार के सदस्यों को भी धमकाया जा सकता है। कार्यक्रम में काउंसलर सोनिया ने एचआईवी के बारे में विस्तार से जानकारी दी। बताया कि एचआईवी कैसे फैलती है, इससे कैसे बचा जा सकता है और आने वाली नस्लों को एचआईवी से कैसे बचाया जा सकता है।
एडवोकेट निशा गुप्ता ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से चलाए जा रहे कार्यक्रमों के बारे में बताया। उन्होंने बताया की प्राधिकरण महिलाओं और जिनकी आमदनी तीन लाख से कम है उनको कानूनी सलाह निशुल्क देता है। महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रतिनिधि मंजू ने योजनाओं की जानकारी दी। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने एचआईवी की जांच करवाई।
फाइल फोटो--कल्पना।