संवाद न्यूज एजेंसी
गुहला-चीका। राजकीय संस्कृत माडल वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय दिव्यांग विद्यार्थियों की समावेशी शिक्षा उन्मुखीकरण के लिए दो दिवसीय जागरूकता शिविर लगाया। इसमें प्रधानाचार्य मेधाव्रत ने कहा कि दिव्यांग विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा का माहौल और उनके सर्वांगीण विकास के लिए समावेशी शिक्षा बहुत जरूरी है।
उन्होंने कहा कि स्कूलों में पढ़ रहे सामान्य विद्यार्थियों के मुकाबले शिक्षकों को दिव्यांग विद्यार्थियों की शिक्षा व जरूरत का ध्यान रखना होता है ताकि उनमें किसी प्रकार की हीन भावना विकसित न हो सके।इस शिविर में शिक्षकों को दिव्यांग विद्यार्थियों की पहचान उनकी समस्याओं का समाधान, विशेष रूप से सरल पाठ्यक्रम तैयार करना, सामान्य विद्यार्थियों की तरह व्यवहार रखना इत्यादि के बारे में बताया गया।
इस मौके पर इंद्रजीत कौर ने दो दिवसीय शिविर में दिव्यांग छात्रों की प्रारंभिक अवस्था में पहचान का महत्व बताया। प्रशिक्षण अधिकारी विजय कुमार ने दिव्यांग बच्चों की प्रारंभिक अवस्था में पहचान करने के तरीकों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि दिव्यांग बच्चों की प्रारंभिक अवस्था में पहचान होने से अभिभावकों के लिए उनकी देखभाल करना आसान रहता है।
रजनी शर्मा व सुमनप्रीत कौर ने दिव्यांगजन अधिनियम 2016 के बारे में पूर्ण जानकारी दी। शिविर के दौरान अध्यापक भगवान दास व अन्य शिक्षकों ने अपने अनुभव साझा किए।