संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। बात्ता गांव में पीने के पानी की एक एक बूंद को लोग तरस रहे हैं। ग्रामीण सुनील कुमार, संजीव, कुलदीप, अशोक, तरसेम, सुशीला, प्रेम देवी आदी ने बताया की एक तो गर्मी अपनी चरम सीमा पर है उस पर पिछले करीब 15 दिनों से उन लोगों को पीने का पानी की नहीं मिल रहा।
उन्होंने बताया कि सजूमा रोड, इंदिरा कॉलोनी व इसके आसपास के क्षेत्र में तो पानी की इतनी किल्लत है कि लोगों को खेतों से पानी ला कर अपने परिवारोंं की प्यास बुझाना पड़ रही है। पानी के जो विभाग ने टैंक बनाए हैं वे तो लगभग एक वर्ष से ही खाली पड़े हैं।
लोगों ने बताया कि इतनी भीषण गर्मी में महिलाओं व पुरुषों का पूरा-पूरा दिन दूर दराज खेतों से पानी लाने में ही गुजर जाता है। इंदिरा कॉलोनी में लगभग मजदूरी करने वाले लोग ही रहते हैं। ये लोग पानी लाएं या मजदूरी करके अपने परिवारों का पेट पालें। तरसेम, अशोक आदि ने बताया कि पीने के पानी का प्रबंध तो खेतों से कर लिया जाता है बाकी नहाने, कपड़े धोने, बर्तन मांजने के लिए पानी का प्रबंध सिरदर्दी बन गया है।
उनका कहना है कि समस्या पिछले करीब 15 दिनों से ज्यादा गहरा गई है। समस्या को लेकर वे बार बार विभागीय कर्मचारियों व अधिकारियों से मिल रहे हैं पर न तो समस्या का कोई हल मिल रहा तथा न ही ठोस आश्वासन। लोगों ने कहा कि यदि यही हाल रहा तो मजबूरन लोगों को अपनी समस्या के समाधान के लिए सडक़ों पर उतरना पड़ेगा जिसकी सारी जिम्मेदारी जन स्वास्थ्य विभाग की होगी।
गांव बात्ता में तैनात जन स्वास्थ्य विभाग के कनिष्ठ अभियंता मनोज कुमार ने कहा कि सोमवार तक समस्या का समाधान हो जाएगा। कहा कि नहरी पानी 32 दिनों के बाद ही आता है। क्षेत्र में जलापूर्ति के लिए बोरवेल लगाए गए हैं। बोरवेल खराब हो गया और जो दूसरा लगवाया वह रेत फेंक रहा है। पास के खेतों से पानी लेने का भी प्रबंध किया गया पर खेतों में बिजली रात्रि में ही आती है।