संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय में महर्षि वाल्मीकि जीवन दर्शन-योगवासिष्ठ के परिप्रेक्ष्य में विषय पर आयोजित होने वाले द्वि-दिवसीय अंतर राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य महर्षि वाल्मीकि शोध पीठ का वाल्मीकि द्वारा रचे गए
ग्रन्थों पर आधारित शोध कार्यों को बढ़ावा देना है। शोधपीठ के माध्यम से विश्व भर से योगवासिष्ठ की पाण्डुलिपियों का संकलन कर समालोचनात्मक संस्करण तैयार किया जाएगा।
इस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में दिल्ली विश्वविद्यालय से प्रो. ओमनाथ बिमली, सारस्वत अतिथि के रूप में लाल बहादुर शास्त्री केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय नई दिल्ली के
पूर्व कुलपति प्रो. रमेश कुमार पाण्डेय तथा मुख्य अतिथि के रूप में नेपाल संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. माधव अधिकारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमेश चंद्र भारद्वाज ने की। इस अवसर पर संगोष्ठी की स्मारिका का भी विमोचन किया। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. भारद्वाज ने कहा कि यह संगोष्ठी महर्षि वाल्मीकि के जीवन दर्शन को समझने और उसे समाज तक पहुंचाने के लिए आयोजित की जा रही है। वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण एवं योगवासिष्ठ में जीवन के महत्वपूर्ण सिद्धांत छिपे हुए हैं, जो वर्तमान में संपूर्ण विश्व का मार्गदर्शन कर सकते हैं, और कई समस्याओं का समाधान भी कर सकने में सक्षम हैं।
यह संगोष्ठी महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित योगवासिष्ठ को केंद्र में रखकर आयोजित की जा रही है। जिसमें जीवन दर्शन एवं प्रबंधन से संबंधित कुल 17 विषयों को चिह्नित किया है। संगोष्ठी में देश विदेश के विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के प्रतिष्ठित विद्वान एवं शोधार्थियों के द्वारा शोध-पत्र प्रस्तुत किए।
उन्होंने कहा कि 27 अक्तूबर को शाम तीन बजे संगोष्ठी का समापन समारोह आयोजित होगा। इस अवसर पर परमार्थ शंकराश्रम, कैथल से महामंडलेश्वर स्वामी विरागानंद गिरी, श्री लाल बहादुर शास्त्री केन्द्रीय विश्वविद्यालय से प्रो.
शिव शंकर मिश्र एवं प्रो. जवाहर लाल, नेपाल संस्कृत विश्वविद्यालय के आचार्य, प्रो. रघुनाथ नेपाल और डॉ. शिव प्रसाद न्योपोने सहित अन्य प्रतिभागी विद्वान एवं शोधार्थी उपस्थित थे ।