संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। हर साल मकर संक्रांति का महापर्व 14 जनवरी को मनाया जाता है। इस साल मकर संक्रांति पर्व 15 जनवरी को मनाया जाएगा। पंडित विशाल शांडिल्य ने बताया कि मकर संक्रांति का पर्व हिंदू कैलेंडर के आधार पर मनाया जाता है इसमें सूर्य के गोचर की गणना का ध्यान रखा जाता है। जिस समय सूर्य का गोचर मकर राशि में होता है उस समय मकर संक्रांति होती है। उसे सूर्य की मकर संक्रांति कहते हैं। सूर्य देव हर राशि में करीब एक माह तक विराजमान होते हैं।
मकर शनि देव की राशि है और इसमें जब सूर्य देव आते हैं तो वे दक्षिणायन से उत्तरायण होते हैं। उत्तरायण को देवताओं का दिन कहा जाता है। उत्तरायण को देवता का दिन कहा जाता है। सूर्य के राशि बदलने के समय से ही संक्रांति मनाने निर्णय किया जाता है। इसलिए मकर संक्रांति के समय में बदलाव होता है। उन्होंने बताया कि इस बार सूर्य देव 15 जनवरी की प्रात:काल दो बजकर 54 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश कर रहें हैं। अत: 15 जनवरी सोमवार को मकर संक्रांति मनाई जाएगी।
इस बार पुण्यकाल 15 जनवरी को सुबह सात बजे से शुरू हो जाएगा,जो सूर्यास्त शाम को पांच बजकर 36 मिनट तक रहेगा। इसमें स्नान, दान, जाप कर सकते हैं। मकर संक्रांति का महापुण्य काल प्रात: काल सात बजे से प्रात: काल आठ बजकर 46 तक रहेगा।
शांडिल्य ने बताया कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मकर संक्रांति के दिन ही सूर्य देव अपने पुत्र शनि से मिलने उनके घर जाते हैं। यह पर्व पिता-पुत्र के अनोखे मिलन से भी जुड़ा है। पौराणिक कथा के अनुसार जब सूर्य देव पहली बार पत्नी छाया और उनके बेटे शनि से मिलने उनके घर आए थे तो शनि देव ने काले तिल से उनका स्वागत किया था। सूर्य देव ने प्रसन्न होकर शनि देव को आशीर्वाद दिया कि जब भी मैं मकर राशि में प्रवेश करुंगा और जो लोग इस दिन मुझे काले तिल अर्पित करेंगे उनके जीवन में सुख-समृद्धि आएगी, उनका घर धन-धान्य से भर जाएगा।
मकर शनि की राशि है, यही वजह है कि मकर संक्रांति बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है। 15 जनवरी को मकर संक्रांति के समय सूर्य देव का वाहन अश्व और वस्त्र श्याम यानि काले रंग का होगा। सूर्य देव श्याम वस्त्र पहनें घोड़े पर सवार होकर दक्षिणायन से उत्तरायण होंगे। सूर्य देव का उपवाहन सिंहनी है। उनका अस्त्र तोमर है।