तालाबों से अवैध कब्जे छुड़वाने की मुहीम के बीच शुक्रवार को भी प्रशासन ने अवैध कब्जे हटवाए। हालांकि लोगों ने विरोध भी किया। लेकिन भारी पुलिस बल के बीच प्रशासन ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया। वीरवार को अरछंड तालाब पर युवाओं और बुजुर्गों द्वारा की गई नारेबाजी ने भी प्रशासन की टीम के खूब पसीने छुड़वाए। हालांकि भारी सुरक्षा बल कार्रवाई के दौरान मौजूद रहता है। इसके बावजूद भी जो तनाव की स्थिति बनी है। उससे प्रशासन बेचैन है। उन्हें समझ नहीं आ रहा कि तालाबों की खाली जमीन से कब्जा हटाने में ये हालात है तो आगे क्या होगा?
नगरपालिका सचिव सुशील भुक्कल ने बताया कि प्रशासन हर व्यक्ति को संतोषजनक जवाब देते हुए कब्जा हटाओ अभियान चलाए हुए है। अमन-चैन और व्यवस्था बनी रहे, इसके लिए लोगों से सहयोग की अपील हर स्तर पर की जा रही है। संपूर्ण कार्रवाई को न्यायालय के आदेश पर पारदर्शिता से चलाया जा रहा है।
वहीं तालाबों को अवैध कब्जों से मुक्त करने के अभियान ने नगरपालिका की मुश्किलें पग-पग पर बढ़ा रखी है। लोगों द्वारा सवाल उठाए जा रहे हैं कि जब दशकों से सरकारी जमीन व तालाबों पर अवैध कब्जों की कार्रवाई जारी थी तो प्रशासन कहां सो रहा था? जिस जमीन को अवैध कब्जा करार दिया जा रहा है वहां रजिस्ट्री कैसे हुई, गलियां-नालियां किसने बनाई, बिजली, पेयजल व सीवरेज लाइन कैसे बिछी? अवैध आवासीय क्षेत्र में मकानों के नंबर कैसे लगे? सरकारी व तालाबों की जमीन जब टुकड़ों के रूप में रजिस्ट्री के माध्यम से बिक रही थी तो राजस्व अधिकारी आंख क्यों मूंदे थे? आवासीय क्षेत्रों में इस अभियान का पुरजोर विरोध होना लाजमी है।
प्रभावितों का कहना है कि उन्होंने पाई-पाई जोड़कर आशियाना खड़ा किया है। इसकी एक ईंट को भी वे उखाड़ने नहीं देंगे। महिलाओं द्वारा बुधवार को मोर चढ़ाई तालाब पर जेसीबी मशीन के आगे डटना और जोरदार प्रदर्शन करना हालातों को बयां कर रहा है।