कलायत। कैथल में सम्राट मिहिर भोज प्रतिमा अनावरण के विरोध में 25 अगस्त से कलायत में बेमियादी धरना प्रदर्शन जारी है। इस बीच शुक्रवार को दो परियोजनाओं का उद्घाटन करने के लिए गांव कौलेखां जा रहे राज्यमंत्री और सांसद को धरनास्थल के सामने से होकर गुजरना था। तभी राजपूत समाज के युवा हाथों में काले झंडे लेकर कलायत में प्रवेश होने वाले राष्ट्र्रीय राजमार्ग पर बड़ी संख्या में जमा हो गए। ऐसे में राज्यमंत्री और सांसद को विरोध के बीच दूसरे रास्ते से गांव कौलेखां जाना पड़ा। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि प्रदेश के राजपूत बहुल 1300 गांवों और कस्बों में भाजपा नेताओं को प्रवेश न करने देने का निर्णय पहले ही लिया जा चुका है।
विदित हो कि रामगढ़ मोड़ पर जारी प्रदर्शन में राज्य के 1300 राजपूत बहुल गांवों से प्रतिदिन एक गांव के लोग धरने की कमान संभाल रहे हैं। शुक्रवार को जिला जींद के गांव माल सिवाना के प्रतिनिधियों ने प्रदर्शन की कमान संभाली।
इस दौरान विनोद थंबड, सलिंद्र प्रताप, जयदीप राणा और प्रमोद राजौंद ने कहा कि प्रदेश सरकार को हठधर्मिता का रवैया छोड़कर उनकी मांगें पूरी करनी चाहिए। मुद्दा इतिहास संरक्षण से जुड़ा है, लेकिन जिस प्रकार राजनेताओं का रवैया है, उसका खामियाजा निश्चित तौर से 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव में केंद्र एवं राज्य सरकार को भुगतना होगा। कलायत मार्ग पर राज्यमंत्री और सांसद का विरोध करने वालों में महीपाल राणा, सलिंद्र राणा, संजीव राणा, अजय प्रताप, राहुल राणा, संजू राणा, साहिल राणा, मंयकर राणा, प्रदीप राणा, जयदीप राणा, अमित राणा, दिनेश राणा शामिल रहे।