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पिज्जा मामले में प्रशासन का अजीब रवैया

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कैथल। लॉक डाउन के बीच पुलिस प्रशासन के दोहरे मापदंड सामने आ रहे हैं। अब थाना सिविल लाइन प्रभारी प्रह्लाद राय का कहना है कि तहसीलदार ने अपनी जांच रिपोर्ट में स्पष्ट कर दिया है कि वहां कोई कुर्सी नहीं थी। ना ग्राहक थे। सोशल डिस्टेंसिंग मेंटेन थी। दिल्ली में पिज्जा ब्वॉय के माध्यम से फैले कोरोना मामले से पूर्व पिज्जा दुकानें देश भर में होम डिलीवरी के लिए खुली थी। उसके बाद से यहां भी बंद करवाई गई। उन्हें पहले अनुमति थी। अब अनुमति है या नहीं, इस बारे में जानकारी नहीं हैं। उसके खिलाफ एफआईआर नहीं बनती।
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बड़ा सवाल, दोहरा मापदंड क्यों?
अब यहां सवाल उठता है कि यदि पिज्जा मामले में लॉक डाउन के दौरान उसे होम डिलीवरी की अनुमति थी तो अब पिज्जा शॉप बंद क्यों हैं? अब उन्हें क्यों नहीं होम डिलीवरी करने की अनुमति दी जा रही। इसका मतलब यह है कि यह पहले खुली थी तो गलत खुली थी। यदि गलत खुली थी तो प्रशासन द्वारा उस तरह से कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही? जिस तरह से बाकि दुकानें खोलने पर तुरंत एफआईआर हुई। संभवत: इस मामले में प्रशासन शुरू से ही लीपापोती मोड़ में रहा। अब सवाल यह उठता है कि इस तरह से तो बाकि दुकानदार भी अपने दुकानें खोल सकते थे, लेकिन उन्होंने पीएम मोदी के आदेश का पालन किया। केवल आवश्यक वस्तुओं की दुकानें ही खुली हैं। इसके अलावा जब पूरे देश में शॉपिंग मॉल्स बैन हैं तो इस शॉपिंग मॉल में दुकान कैसे खुल गई?
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