आरकेएसडी कॉलेज के अध्यापक कक्ष में साहित्य सभा की अप्रैल माह की काव्य गोष्ठी का आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। आरकेएसडी कॉलेज के अध्यापक कक्ष में रविवार को साहित्य सभा की ओर से अप्रैल माह की काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी का शुभारंभ श्याम सुंदर गौड़ ने मां भगवती को समर्पित ‘देवी तेरी शक्ति अपार। आदि शक्ति मां दुर्गा भवानी। बावन सिद्ध पीठों वाली, तेरी महिमा अपार’ काव्य-पंक्तियों से किया। इसके बाद राजेश भारती ने कहा ‘मैंने सुना था वक्त का मरहम, सब जख्मों को भर देता है’ रचना सुनाई। वहीं दिलबाग अकेला ने ‘झुककर प्रणाम करते, हम भीमराव को, छुआछूत मिटाई, मिटाया भेदभाव को’ सुनाकर बाबा साहेब को नमन किया।
इस अवसर पर मछलियों को निरीह जनों का प्रतीक बनाते हुए बलवान कुंडू सावी ने कहा ‘मछलियों, तुम्हें जीना सीखना होगा। मछलियों, तुम हर जगह मारी जाओगी। जहां तुम इकट्ठी होंगी, वहां फेंका जाएगा जाल’। दिनेश बंसल दानिश ने कहा ‘आईना तब दिखाना हाकिम को, जब कराना हो सर क़लम साहिब’। एक नेक सलाह डॉ. तेजिंद्र ने भी अपने इस मुक्त में इस प्रकार दी ‘उसकी हर इक बात बड़ी कर दे। सूखे को सावन की झड़ी कर दे। चुप रह कि जब तक तेरा काम नहीं बनता, फिर बेशक उसकी खाट खड़ी कर दे’ रचना सुनाई। चाय को अपनी सखी मानते हुए नीरु मेहता ने कहा ‘जब होती हूं बिल्कुल अकेली। जब नहीं होती संगी-सहेली,जब सूनी हो मन की हवेली। तब चाय पी लेती हूं’
ईश्वर चंद गर्ग ने कहा ‘खेमे, कबीले, पारसी, मुस्लिम, सनातनी, कौमी महावतों के हैं चाबुक-लगाम सब’। नारी-शक्ति-वंदन करते हुए रजनीश शर्मा ने कहा ‘स्त्री तू शक्ति है, तू दुर्गा है, तू काली है। पन्ना धाय तू, तू मेवाड़ के माथे की लाली है’। रिसाल जांगड़ा ने कहा ‘किसी भी गोरख-धंधे से यह दुनियां कमतर नहीं है, करतीं हैं उलझनें लाचार तो नींद नहीं आती’। आज के दूषित वातावरण में आम जन को आंदोलित करते हुए कमलेश शर्मा ने कहा ‘ सत्ता के गलियारे से उठते, विषैले धुंए को रोको। वरना मनु के आदि पुत्रों द्वारा रोपा गया वृक्ष, सूख जायेगा’। प्रो. अमृत लाल मदान ने अपनी दो क्रांतिकारी कविताओं का पाठ करते हुए उपस्थित साहित्यकारों को साहित्य सभा के पुस्तकालय से पुस्तकें लेकर पढऩे की, उन पुस्तकों की विषय-वस्तु पर चिंतन-मनन करने की और समय पर पुस्तकें लौटाने की सलाह दी। इस मौके पर अनिल कौशिक, स्वामी टीसी अग्रवाल, रामफल गौड़, अनिल गर्ग, मधु गोयल मधुल, अमृत सचदेवा, महेंद्र पाल सारस्वत काण्व द्विवेदी, चतरभुज बंसल सौथा, प्रीतम लाल शर्मा और रवींद्र मित्तल ने भी अपनी रचनाओं का पाठ किया।