कैथल। हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी अब एसजीपीसी पर दबाव डालने की रणनीति पर उतर आई है।कमेटी द्वारा गुरुद्वारों के मैनेजरों को रिकॉर्ड सहित तलब करने जैसे कई कदम उठाएं हैं। लेकिन इस आदेश की पालना गुरुघरों के मैनेजरों द्वारा आसान नजर नहीं आ रही है।
जानकारों का मानना है कि गुरुद्वारों के मैनेजर एसजीपीसी के कर्मचारी हैं, जब तक एसजीपीसी द्वारा कोई आदेश जारी नहीं हो जाता, तब तक मैनेजर शायद ही किसी अन्य के आदेशों का पालन करें। दूसरा श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा जारी आदेश भी मैनेजरों के लिए ढाल बन सकते हैं।
अब देखना है कि दो अगस्त को इन गुरुद्वारों के मैनेजर एचएसजीएमसी के कार्यालय में हाजिर होते हैं या नहीं? लेकिन एचएसजीएमसी के प्रधान जगदीश सिंह झींडा ने स्पष्ट कहा है कि हरियाणा की अलग कमेटी का गठन हो गया है। अब गुरुद्वारों के कर्मचारी एसजीपीसी के नहीं एचएसजीएमसी के कर्मचारी हैं। ऐसे में वे कानूनी रूप से एचएसजीएमसी के आदेशों को मानने के लिए बाध्य हैं।
कार्रवाई के कई रास्ते : झींडा
झींडा ने स्पष्ट तौर पर कहा कि एचएसजीएमसी के गठन के बाद गुरुघरों के गोलक खोले जा रहे हैं तथा बैंकोें से भी राशि निकलवाई जा रही है। ऐसे में रिकार्ड तलब कर लिया गया है, जिसमें गुरुघरों में कार्यरत कर्मचारियों की संख्या सहित पूरा रिकॉर्ड तलब किया गया है। जांच की जाएगी।
यदि कोई अनियमितता पाई गई तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई होगी। मैनेजरों के तलब किए जाने के बावजूद हाजिर न होने के प्रशभन पर झींडा ने कहा कि यदि मैनेजर नहीं आते हैं तो उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई जाएगी। जब उनसे पूछा गया कि एफआईआर दर्ज होने की स्थिति में पुलिस कार्रवाई होगी। जबकि हरियाणा सरकार ने स्पष्ट किया है कि पुलिस गुरुद्वारों में प्रवेश नहीं करेगी तो झींडा ने कहा कि कार्रवाई के ओर काफी रास्ते हैं।
शांतिपूर्वक गुरुघरों को छोड़े एसजीपीसी
श्री अकाल तख्त की ओर से एचएसजीएमसी के गुरुघरों की सेवा संभाल पर रोक लगाए जाने संबंधी हुक्मनामे की पालना के सवाल पर झींडा ने कहा कि एचएसजीएमसी द्वारा गुरुघरों की सेवा संभाल के लिए कोई जबरदस्ती नहीं की जा रही है। श्री अकाल तख्त साहिब के हुक्मनामे की पालना हो रही है। एचएसजीएमसी पूरी तरह से कानूनी तरीके से सेवा संभाल लेने का प्रयास कर रही है। इसके लिए एसजीपीसी एवं बादल से अपील की जा रही है कि गुरुघराें की सेवा शांतिपूर्वक तरीके से छोड़ दें, ताकि कोई बखेड़ा खड़ा न हो।
गले की फांस बन सकता है आदेश
दूसरी ओर एचएसजीएमसी द्वारा जारी आदेश गुरुद्वारों के मैनेजरों एवं बैंक प्रबंधकों के लिए गले की फांस बन सकते हैं। क्योंकि यदि वे एचएसजीएमसी के आदेशों को नहीं मानेंगे तो उन्हें कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। दूसरा यदि वे इन आदेशों को मान लेते हैं तो एसजीपीसी के आदेशों की अवमानना हो सकती है।
तीन घंटे तक चली मीटिंग
गुरुद्वारा नीम साहिब में करीब तीन घंटे तक लंबी मीटिंग हुई। इस दौरान काफी संख्या में सिख संगत एवं नेतागण बाहर इंतजार करते नजर आए। एचएसजीएमसी की 41 सदस्यीय कमेटी में शामिल सदस्य बलवत सिंह पिहोवा, हाकम सिंह पिहोवा, हरदीप नरुला, अमीर सिंह अरोड़ा, करनैल सिंह निमनाबाद, जसविंद्र सिंह आदि बाहर बैठ कर इंतजार करते नजर आए। कुछ सदस्यों ने रोष प्रकट करते हुए कहा कि यदि उन्हें मीटिंग में भाग ही नहीं लेना था तो बुलाया ही क्यों? दूसरी ओर एचएसजीएमसी की इस मीटिंग पर देश भर की नजरें लगी रहीं।