संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिला नागरिक अस्पताल के वेंटिलेटर इस समय किसी भी काम नहीं आ रहे। दरअसल, इनके लिए कोई भी ऑपरेटर नहीं है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग की ओर से वेंटिलेटर की देखभाल के लिए अलग बजट का भी कोई प्रावधान नहीं किया गया है। ऐसे में बिना बजट के वेंटिलेटर खराब हो जाते हैं।
गौरतलब है कि इस समय जिला नागरिक अस्पताल में 31 वेंटिलेटर हैं। इसमें से सात वेंटिलेटर कोरोना महामारी के समय में आए थे। इसमें से दो वेंटिलेटर बिल्कुल खराब हो चुके हैं। जो चलने की स्थिति में नहीं हैं। इस कारण जिले में आपातकालीन स्थिति में सांस के गंभीर मरीजों को रोहतक या चंडीगढ़ पीजीआई में भेजना पड़ता है।
वेंटिलेटर को चलाने के इस स्टाफ की होती जरूरत ः गौरतलब है कि वेंटिलेटर संचालन के लिए एक चिकित्सक, दो स्टाफ नर्स, एक ओटी टेक्निशियन की जरूरत होती है। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि कोरोना महामारी के समय में वेंटिलेटर चलाने के लिए प्रशिक्षक के तौर पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से ऑपरेटर भेजे गए थे, लेकिन कोरोना महामारी के बाद इन्हें नियमित रूप से नहीं रखा गया। इस कारण वेंटीलेटर का संचालन नहीं हो पा रहा है।
जिला नागरिक अस्पताल में आए हुए वेंटिलेटर के लिए उसी बजट के अनुरूप मेंटनेंस की जा रही है, जो बजट अन्य मशीनों के लिए अस्पताल में आ रहा है। इस समय आईसीयू के अधिकतर वेंटिलेटर रखे हैंं। आईसीयू शुरू होने के बाद यह सभी वेंटिलेटर शुरू कर दिए जाएंगे। - डॉ. रेनू चावला, सिविल सर्जन, कैथल।