दस माह बाद खुले स्कूलों में पहले दिन विद्यार्थियों की संख्या पंद्रह से बीस प्रतिशत रही। विद्यार्थी स्वास्थ्य केंद्रों पर मेडिकल प्रमाण पत्र के लिए भटकते रहे। यहां सामान्य दिनों की अपेक्षा सोमवार को मरीजों की अत्यधिक भीड़ उमड़ी। इसी दौरान स्कूली बच्चों के लिए मेडिकल प्रमाण पत्र बनवाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। विद्यार्थियों के साथ पहुंचे अभिभावकों को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
विदित रहे कि सरकार की ओर सोमवार से कक्षा छठी से बारहवीं तक विद्यार्थियों के लिए तीन घंटे स्कूल खोले गए। विद्यार्थियों को मेडिकल प्रमाण पत्र लेकर आना अनिवार्य किया गया था। लेकिन पहले दिन विद्यार्थी मेडिकल प्रमाण-पत्र बनवाने में उलझे रहे। हालांकि बच्चे मास्क जरूर पहुंचे।
जिला अस्पताल में मेडिकल प्रमाण पत्र के लिए भटकते रहे विद्यार्थी- स्वास्थ्य की जांच के लिए जिला अस्पताल में स्कूली विद्यार्थी इधर-उधर भटकते रहे। सबसे पहले विद्यार्थियों को पंजीकरण के लिए लाइनों में लगना पड़ा। जिससे उनके कई घंटे बर्बाद हुए। वहीं पंजीकरण कक्ष में तैनात कर्मचारी मोबाइल फोन में व्यस्त रहे। काउंटरों पर मरीजों की भीड़ उमड़ी रही। जिनमें स्कूली बच्चे भी शामिल थे।
जिला शिक्षा अधिकारी अनिल शर्मा ने कहा कि अवकाश के कारण बच्चों तक सूचना नहीं पहुंची। अगले दिन सभी स्कूल मुखियों को इस बारे में निर्देश दिए गए है। बाकायदा ड्यूटी लगाई गई है। वहीं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया गया है। बच्चों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी।
राजकीय कन्या स्कूल जाखौली अड्डा में 15-20 पहुंचे बच्चे- जींद रोड स्थित राजकीय कन्या स्कूल में कक्षा छठी से आठवीं तक के 15-20 बच्चे ही पहुंचे। यहां पहुंचे विद्यार्थियों ये बताया उन्हें मेडिकल प्रमाण पत्र बनवाने के बारे में किसी प्रकार भी सूचना नहीं थी। स्कूल में आकर ही सूचना मिली है।
बवॉज स्कूल में भी नाममात्र पहुंचे विद्यार्थी- कमेटी चौक स्थित राजकीय ब्वायॅज स्कूल में भी नाममात्र ही बच्चे पहुंचे। जो भी बच्चे स्कूल पहुंचे है। उन्ंहे मेडिकल प्रमाण पत्र बनवाने के लिए अवगत करवाया गया।
राजकीय स्कूल शेरगढ़ में 20 प्रतिशत पहुंचे विद्यार्थी- गांव शेरगढ़ के राजकीय स्कूल में कक्षा छठी से आठवीं तक केवल 20-22 विद्यार्थी पहुंचे। बिना मेडिकल प्रमाण-पत्र के विद्यार्थियों को कक्षा में अनुमति नहीं दी गई।
ऑनलाइन कक्षाओं में ठीक से नहीं होती थी पढ़ाई-
राजकीय कन्या स्कूल जाखौली की कक्षा सातवीं की छात्रा सोनिया ने कहा कि घर पर मोबाइल फोन में ऑनलाइन पढ़ाई करते थे। कभी नेटवर्किंग की समस्या तो कभी इंटरनेट की समस्या रहती थी। ऑनलाइन कक्षाओं में ठीक से समझ नहीं पाते थे। स्कूलों में आकर काफी अच्छा लगा।
ऑनलाइन पढ़ाई के लिए मोबाइल का करना पड़ता था इंतजार
छात्रा राखी ने कहा कि घर पर बहन पढ़ाई करवाती थी। मोबाइल फोन के इंतजार मेें बैठना पड़ता था। इसके बाद ऑनलाइन क्लासों में जुड़ते थे। तब तक आधी क्लास निकल जाती थी।
दैनिक कार्य हुआ प्रभावित- बच्चों के साथ जिला अस्पताल में पहुंचे अभिभावक अमरगढ़ गामड़ी निवासी संजय ने कहा कि बच्चों के मेडिकल प्रमाण पत्र के लिए आये थे। यहां पहले बच्चों का कोरोना सैंपल लिए गए। इसके बाद रिपोर्ट आने तक इंतजार करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि इस काम के लिए पूरा दिन बर्बाद हो गया। जिससे उनका दैनिक कार्य भी प्रभावित हुआ।
आज की दिहाड़ी तो यहीं लग गई- अभिभावक शिवकालोनी निवासी जसबीर ने कहा कि मेडिकल प्रमाण पत्र बनवाने के लिए बच्चों के साथ जिला अस्पताल आना पड़ा। यहां पर भी काफी अव्यवस्था मिली। जिससे दिनभर की दिहाड़ी निकल गई। उन्होंने कहा कि स्कूलों में ही इस तरह की व्यवस्था होनी चाहिए।