। जिला नागरिक अस्पताल में अब मरीजों को इलाज से पहले रजिस्ट्रेशन करवाने और ओपीडी में मोबाइल नंबर देना अनिवार्य किया गया है। ऐसे में उन मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जिनके पास मोबाइल नहीं हैं। खासकर बुजुर्ग और अशिक्षित लोगों को परेशानियां आ रही है। दूसरा अस्पताल में कोरोना की जांच के लिए भी लोग पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों द्वारा जांच के बाद ऐसे कोरोना संक्रमित लोगों को ढूंढने में परेशानी हो रही थी, जिन्होंने अपना मोबाइल नंबर नोट नहीं करवाया। इस कारण विभाग ने पर्ची और ओपीडी के समय मोबाइल नंबर को अनिवार्य किया है।
मोबाइल नंबर लिखवाने की दी जा रही हिदायतें
मोबाइल नंबर अनिवार्य होने की जानकारी के अभाव में अब भी मरीज अस्पताल में बिना कोई नंबर लिए पहुंच रहे हैं। जिन मरीजों के पास मोबाइल नहीं है, फिलहाल उन्हें सलाह दी जा रही है कि जब भी वे दोबारा अस्पताल में आते हैं तो असल तो खुद का नहीं तो फिर किसी परिजन का नंबर नोट करवा दें, ताकि बाद में इलाज के लिए बुलाने पर डॉक्टरों या स्टाफ को समस्या न हो। इलाज पहले की तरह ही चल रहा है।
अस्पताल में पहुंची गांव सौथा से पहुंची महिला सुनहरी देवी व शहरवासी संतोष ने बताया कि अभी तो पर्ची बिना नंबर के कट गई है। अगली बार परिवार के किसी सदस्य का नंबर लिखवाकर लाने की बात कर्मचारियों ने कही है।
पहले केवल आधार कार्ड से नोट किया जाता था नाम, पता व उम्र- इससे पहले मरीजों से केवल आधार कार्ड लिया जाता था। उसी के आधार पर आयु, नाम व पता लिखे जाते थे। अब मरीजों के लिए मोबाइल नंबर लिखवाना भी जरूरी किया गया है। अगर किसी मरीज को डॉक्टरों द्वारा अस्पताल में बुलाना पड़ता था तो उसका नाम पता ही रिकॉर्ड में होता था। मोबाइल नंबर होने से डॉक्टरों और मरीजों को दोनों को सुविधा होने का अनुमान है। सिविल सर्जन डॉ. ओमप्रकाश ने बताया कि सोमवार से ही यह शुरूआत की गई है। मोबाइल नंबर नोट करवाना मरीजों व डॉक्टर दोनों के लिए सुविधाजनक है।