जिले में नासूर बनते जा रहे हेपेटाइटिस-सी के इलाज के लिए सरकार द्वारा दवा निशुल्क किए जाने पर अस्पताल में मरीजों की भीड़ उमड़ पड़ी है। गत 14 मार्च से सरकारी अस्पताल में इस दवा से निशुल्क इलाज शुरू किया गया था। महज दस दिनों में करीब 600 से ज्यादा रोगियों की दवा के लिए विभाग को लिखना पड़ा है। वहीं करीब 100 लोगों को निशुल्क इलाज के लिए कूपन जारी किए जा चुके हैं। करीब 25 को दवा मिलना भी शुरू हो गई है। जिले भर में हजारों की संख्या में इस बीमारी से लोग पीड़ित हैं।
वर्ष 2012 में राजौंद एरिया में कई गांवों के लोगों को इस बीमारी ने अपनी चपेट में लिया था। उस समय इसके इलाज पर करीब डेढ़ लाख रुपये तक की राशि खर्च हुई। लोगों को अपने इलाज के लिए रोहतक, हिसार सहित कई दूर-दराज के अस्पतालों में जाकर हर सप्ताह 7500 रुपये का टीका लगवाना पड़ा। करीब 34 टीके लगवाने के बाद ही इसका इलाज पूरा हो पाता था। इसके बाद कई दवा कंपनियों ने लोगों की मजबूरी का फायदा उठाया और पीड़ित गांवों में कथित तौर पर शिविर लगाकर मरीजों को महंगे दामों पर दवाएं बेचीं।
सरकार ने बीमारी के इलाज के लिए शुरू में अनुसूचित जाति व बीपीएल वर्ग के लिए निशुल्क दवा देने का फैसला लिया। इसके लिए रोहतक स्थित पीजीआई जाकर दवा लेनी पड़ती थी। वहीं सामान्य वर्ग के लोगों के लिए यह बीमारी गंभीर समस्या बन गई। 10 दिन पूर्व तक भी इस बीमारी के इलाज पर 30 से 35 हजार रुपये तक खर्च हुए। जिस कारण गरीब लोगों को काफी परेशानियां हुई थीं।
जिले के कई एरिया में फैली है बीमारी:-
कैथल में राजौंद एरिया से शुरू हुई यह बीमारी कैथल के आस-पास के गांवों, कलायत के कई गांवों, पूंडरी एरिया के कई गांवों व गुहला एरिया में भी काफी संख्या में फैल गई थी। संक्रमित सूई से इंजेकशन लगवाना इस बीमारी के फैलने का मुख्य कारण है।
गत 14 मार्च से शुरू हुआ निशुल्क दवा मिलना:-
लोगों की लंबी मांग के बाद सरकार ने आखिरकार गत 14 मार्च से जिले के सरकारी अस्पताल में इस बीमारी की निशुल्क दवा सभी वर्गों के लिए देनी शुरू की तो अस्पताल में मरीजों की भीड़ उमड़ पड़ी है।
खतरनाक बीमारी है हेपेटाइटिस-सी:-हेपेटाइटिस-सी एक खतरनाक बीमारी है। जिसमें शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता धीरे-धीरे खत्म हो जाती है। इसके वायरस का पता नहीं चलता कि यह शरीर में है और कब सक्रिय हो जाए। रक्त जांच के दौरान ही इसकी जानकारी मिल पाती है।
बीमारी के इलाज के लिए नोडल अधिकारी बनाए गए डा. अनिल अग्रवाल ने बताया कि इस अवधि में 100 लोगों को इलाज के लिए कूपन जारी किए गए हैं। इनके टेस्ट जारी हैं। 25 लोगों की दवा शुरू हो गई है। लोगों की जरूरत को देखते हुए 600 यूनिट की ओर डिमांड भेजी गई है। जिले में काफी लोग इस बीमारी से पीड़ित हैं।