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Kaithal News: स्वास्थ्य विभाग की जांच में पानी के 83 सैंपल फेल मिले, क्लोरीन की मात्रा पर्याप्त नहीं

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गांव सजूमा में पानी की लीकेज को ठीक करने के लिए खोदा गया गड्ढा।
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कैथल। गांव सजूमा में स्वास्थ्य विभाग की ओर से की गई पानी की जांच के अनुसार हेपेटाइटिस ए गंदे पानी की वजह से ही फैला था। स्वास्थ्य विभाग की जांच में जन स्वास्थ्य विभाग की ओर से घरों में सप्लाई किए जा रहे पानी के सैंपल फेल मिले हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से लैब में जांच करवाने पर पानी के 83 सैंपल फेल मिले और इनमें क्लोरीन की मात्रा पर्याप्त नहीं पाई गई।
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जनस्वास्थ्य विभाग और स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में विरोधाभास है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में पानी के सैंपल फेल मिले लेकिन वहीं जन स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि घरों में सप्लाई किया जा रहा पानी पहले दिन से पीने लायक था। स्वास्थ्य विभाग ने ही सैंपल घरों व स्कूलों में से पानी की टंकियों से लिए थे, जिन्हें अक्सर साफ नहीं किया जाता है। वहीं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सैंपल एक जगह से नहीं लिए गए थे और इसमें घरों से पानी की सप्लाई और अन्य जगहों के सैंपल शामिल हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने क्लोरीन की जांच के लिए अब तक 186 सैंपल लिए थे जिनमें से 83 फेल पाए गए हैं। वहीं बैक्टीरिया के 50 सैंपल स्वास्थ्य विभाग ने लिए थे और उनमें से सात सैंपल फेल मिले हैं।
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अब तक हेपेटाइटिस-ए 37 संक्रमित मिल चुके

गांव सजूमा में हेपेटाइटिस-ए के 37 संक्रमित अब तक मिल चुके हैं। चिंता की बात ये है कि इनमें से ज्यादातर बच्चे ही हैं।
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बच्ची की मौत के बाद प्रशासन हरकत में आया

गांव सजूमा के सैनी मोहल्ले की एक 11 वर्षीय लड़की रितिक की पीजीआई चंडीगढ़ में मौत होने के बाद प्रशासन हरकत में आया। गांव वालों के आरोप थे कि बच्ची गंदा पानी पीने से बीमार हुई थी और गांव में कई अन्य बच्चे भी बीमार हो चुके थे। अब तक गांव में हेपेटाइटिस ए के 37 मामले मिल चुके हैं।
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स्वास्थ्य विभाग ने ये दो सैंपल लिए थे जांच के लिए...
स्वास्थ्य विभाग ने अब तक 50 सैंपल बैक्टीरियोलॉजिकल टेस्ट नमूनों की जांच की है। इनमें 7 नमूने फेल, 36 पास मिले हैं। सात की रिपोर्ट अब भी लंबित है। वहीं दूसरा ओटी टेस्ट ये पेयजल में क्लोरीन की उपलब्धता जांचने के लिए होता है। इसके 186 नमूनों का ओटी टेस्ट किया गया। इनमें 103 नमूने पॉजिटिव (पर्याप्त क्लोरीन) और 83 नमूने नेगेटिव (क्लोरीन नहीं या अपर्याप्त) पाए गए।
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हमारे कोई सैंपल फेल नहीं हुए हैं, स्वास्थ्य विभाग ने घरों व स्कूल की टंकियों से पानी के सैंपल लिए थे। टंकियों की सफाई नहीं होने के कारण भी सैंपल फेल आ सकता है। जन स्वास्थ्य विभाग अब तक 100 के करीब सैंपल ले चुका है और सभी में पीने योग्य पानी मिला है। सैंपल फेल होने की बड़ी वजह टंकियों में साफ-सफाई नहीं होना भी हो सकता है। विभाग ने अपने स्तर पर करीब 55 से 60 निजी कनेक्शन को भी ठीक किया है। - जगदीप दलाल, कार्यकारी अधिकारी, जन स्वास्थ्य विभाग, कैथल।
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स्वास्थ्य विभाग ने अपनी लैब में जांच करवाई थी और अलग-अलग जगहों से सैंपल लिए हैं। ज्यादातर सैंपल पहले दिन ही फेल हुए थे। अब गांव में स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है और जन स्वास्थ्य विभाग ने भी हालातों से निपटने में स्वास्थ्य विभाग का सहयोग करते हुए अच्छा काम किया है।
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डॉ. रेणु चावला, सिविल सर्जन, स्वास्थ्य विभाग, कैथल।
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गांव सजूमा में पानी की लीकेज को ठीक करने के लिए खोदा गया गड्ढा।

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