हरियाणा के कैथल के मूंदड़ी गांव में प्रदेश के पहले महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय में नए सत्र से वैदिक गणित और वास्तुशास्त्र का डिप्लोमा कोर्स शुरू होगा। इसके लिए विवि प्रशासन की ओर से आवश्यक तैयारी कर ली गई है। दोनों कोर्सों में 50-50 सीटें निर्धारित की गई हैं।
विवि प्रशासन के अनुसार, ज्योतिष वेद, पुरोहित कर्मकांड, संस्कृत भाषा दक्षता, योग और आयुर्वेद का डिप्लोमा कोर्स पहले से करवाया जा रहा है, जबकि वैदिक गणित और वास्तुशास्त्र का डिप्लोमा कोर्स नए सत्र से शुरू किया जा रहा है।
विदित हो कि वास्तु शास्त्र प्राचीन भारत का वह शास्त्र है, जिसमें ग्रहों की दशा और दिशा तथा घर निर्माण से संबंधित जानकारी दी जाती है। घर किस दिशा में बनाने चाहिए और उसमें नकारात्मक प्रभावों को कम करने के लिए क्या करना चाहिए, आदि विषयों से संबंधित शिक्षा दी जाती है।
माना जा रहा है कि विद्यार्थी इस कोर्स को करने के बाद आसानी से रोजगार पा सकते हैं। दूसरी और वैदिक गणित गणना की प्राचीन प्रणाली है, जिसमें गणितीय समस्याओं को आसान तरीके से हल करने की जानकारी मिलेगी। महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय के उप कुलपति प्रो. रमेश चंद्र भारद्वाज ने कहा कि विवि में नए कोर्सों के लिए आवेदन शुरू हो गए हैं। वैदिक गणित व वास्तुशास्त्र के डिप्लोमा कोर्स में 50-50 सीटें निर्धारित की गई हैं।
विवि में डिप्लोमा कोर्सों की निर्धारित सीटें व अवधि
डिप्लोमा सीटें अवधि
- वास्तुशास्त्र 50 1 वर्ष
- वैदिक गणित 50 1 वर्ष
- ज्योतिष वेद 50 1 वर्ष
- पुरोहित कर्मकांड 50 1 वर्ष
- योग 50 1 वर्ष
- आयुर्वेद 50 2 वर्ष