संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जन्मदिन मुबारक... एक नवंबर को है कैथल का जन्मदिन। अब हमारा कैथल जिला 34 वर्ष का हो गया है। वर्ष 1989 में बने जिले में इन वर्षों में विकास के नए आयाम छुए हैं। हरियाणा गठन के समय कैथल कुरुक्षेत्र जिले का हिस्सा था, उस समय यह केवल उपमंडल था, लेकिन जैसे ही यह 1989 में जिला बना तो यहां विकास के नए रास्ते खुले। वर्तमान समय में कैथल जिला स्वास्थ्य, शिक्षा, परिवहन और विकास परियोजनाओं में अग्रणी जिला बना है।
विदेशों में जहां कैथल का चावल खुशबू बिखेर रहा है वहीं खेलों में भी खिलाड़ियों के नाम चमक रहे हैं। अब तक तीन खिलाड़ियों को अर्जुन अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है। तीरंदाजी में बेहतरीन प्रदर्शन के बाद बुधवार को पैरा ओलंपिक खिलाड़ी हरविंद्र सिंह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे।
दूसरी ओर जिले के गांव सांपन खेड़ी में मेडिकल कॉलेज का निर्माण शुरू होने से विकास को रफ्तार मिलेगी। यहां पर 500 बेड का अस्पताल का निर्माण भी होगा। इसके साथ ही जिले के चीका में आधुनिक बस स्टैंड, क्योड़क में रीजनल सेंटर, कैथल के पुराना अस्पताल परिसर में 100 बेड का बच्चों का अस्पताल, चक्कू लदाना व राजौंद में राजकीय कॉलेज का नया भवन जल्द ही तैयार होगा।कैथल-पटियाला स्टेट हाईवे चार मार्गीय होगा और चीका-यमुनानगर हाईवे का निर्माण शुरू होगा।
वहीं, 2031 में डी प्लान पूरा होगा। इसके बाद शहर में 40 सेक्टर हो जाएंगे। इस समय चार सेक्टर हैं। जिला बनने के समय यहां केवल एक नेशनल हाईवे हिसार-चंडीगढ़ था। अब कैथल में तीन नेशनल हाईवे लगभग बनकर तैयार हो गए हैं। इनमें से हिसार-चंडीगढ़ हाईवे हिसार से आगे राजस्थान तक बन चुका है तो 152 डी के निर्माण ने जिले के विकास की नई गाथा लिखी है। वहीं, जम्मू से कटरा तक जाने वाला नेशनल हाईवे भी जिले के दर्जन भर से अधिक गांवों से होकर निकल रहा है। इसका निर्माण कार्य तेजी से जारी है। उम्मीद है नए साल तक इसकी सौगात जिले के लोगों को मिलेगी। इसके साथ ही नेशनल हाईवे गुहला-चीका से यमुनानगर तक स्वीकृत हुआ है। इस तरह से कैथल जिला अब चार-चार नेशनल हाईवे के माध्यम से विकास की उड़ान भरेगा।
अनेक क्षेत्रों में अभूतपूर्व तरक्की की
एक नवंबर 1989 में जिला बनने के बाद कैथल तब से अब तक कैथल जिले ने राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक, स्वास्थ्य, शिक्षा सहित अनेक क्षेत्रों में अभूतपूर्व तरक्की की है। 152-डी के करनाल रोड, ढांड रोड व असंध रोड पर बनाए गए भव्य पुलों व साइड में गोल चक्र में बनीं सडक़ों से विकास का नया दृश्य पैदा होता है। इन्हें देखकर नहीं लगता कि यह 1989 वाला कैथल जिला है, जिसने विकास की दिशा में नए आयाम छुए हैं।
कैथल जिले की पहचान हरियाणा के अग्रणी खाद्यान्न उत्पादक जिलों में होती है। जहां की बासमती विदेशों में अमेरिका से लेकर यूरोप व अरब देशों तक खुशबू बिखेरती है। यहां का गेहूं व मोटा चावल देश के अन्य राज्यों के लोगों का पेट भरता है। प्रगतिशील किसानों ने हरियाणा में एक अहम स्थान हासिल किया है। नई-नई तकनीकों का प्रयोग करते हुए किसानों ने कई राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तरीय पुरस्कार जीते हैं।
प्रदेश की पहली संस्कृत यूनिवर्सिटी गांव मूंदड़ी में निर्माणाधीन है। आने वाले समय में सभी नेशनल हाइवे का काम पूरा होने के साथ संस्कृत व मेडिकल विश्वविद्यालय, क्योड़क में पशु विश्वविद्यालय का रीजनल सेंटर, गांव धेरड़ू में नर्सिंग कॉलेज, शहर के बीचों-बीच सिटी स्क्वेयर, राजौंद व चक्कू लदाना में सरकारी कॉलेज बन जाने के बाद जिला विकास के मामले में आगे निकल जाएगा।
मुख्य राजनेता एक नजर में ः हलके हरियाणा बनने से लेकर कैथल से स्व. ओमप्रभा जैन, स्व. चरणदास शोरेवाला, स्व. रणसिंह मान, स्व. तेजी मान, सुरेंद्र मदान, रणदीप सुरजेवाला, गीता भुक्कल हरियाणा में कैबिनेट मंत्री रहे। इसके अलावा रामपाल माजरा व रोशन लाल तिवारी मुख्य संसदीय सचिव रहे हैं। इसके अलावा जयप्रकाश केंद्रीय मंत्री रहे। वर्तमान में रणदीप सुरजेवाला कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन में अहम स्थान रखते हैं और राज्यसभा सांसद हैं। राज्यमंत्री कमलेश ढांडा हरियाणा मंत्रिमंडल में महिला एवं बाल कल्याण मंत्री के तौर पर विकास करवा रही हैं।
इन्होंने किया है अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिले का नाम रोशन
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मौजूदा समय में बॉक्सर मनीषा मौण, लासू यादव, कीर्ति ढुल, योगेश ढांडा, पैरालंपिक में स्वर्ण पदक विजेता हरविंद्र सिंह, ओलंपियन रहे बॉक्सर मनोज कुमार, प्रगतिशील किसान ईश्वर कुंडू सहित कई लोगों ने जिले का नाम रोशन किया है।
महाभारत कालीन जिला होने के बावजूद जोह रहा महत्व की बाट
हरियाणा के ऐतिहासिक एवं पौराणिक शहरों में कैथल जिला शुमार है। कैथल कुरुक्षेत्र महाभारत की 48 कोस की भूमि में शामिल है। महाभारत की भूमि में शामिल होने के बावजूद यह जिला ऐतिहासिक महत्व की बाट जोह रहा है।
कैथल में महाभारत से जुड़े कई साक्ष्य मिलते हैं। यहां पर नवग्रह और छोटी काशी के नाम से प्रसिद्ध महाभारतकालीन श्री ग्यारह रुद्री मंदिर खास है। इसके साथ ही माता गेट स्थित सूर्यकुंड मंदिर का भी काफी महत्व है। महाभारत के समय भगवान हनुमान ने कैथल में ही अर्जुन के रथ पर कपि ध्वज की स्थापना की थी।
इसके साथ ही पूंडरी के फरल गांव में फल्गू तीर्थ भी काफी ऐतिहासिक है। यहां पर पितृ पक्ष के दिनों में दूर दराज से लोग पूजा-अर्चना करने के लिए पहुंचते हैं। पितृ पक्ष में सोमवती अमावस्या आने पर यहां पर तीन दिवसीय भव्य मेला भी आयोजित किया जाता है। उस जगह पर वर्तमान समय में श्री दक्षिण मुखी हनुमान मंदिर स्थापित है। जो चिल्ड्रन पार्क के पास स्थित है।
इसके अलावा यहां हनुमान जी की जन्मस्थली माता अंजनी का टीला, वृद्धकेदार तीर्थ, कपिलमुनि तीर्थ कलायत, पूंडरीक तीर्थ पूंडरी, डेरा बाबा राजपुरी, स्वामी विवेकानंद के गुरु स्वामी रामकृष्ण परमहंस के गुरु तोतापुरी जी की गांव बाबा लदाना में समाधि, भाई उदय सिंह का किला, ऐतिहासिक बावड़ी, नवगृह कुंड, फल्गू तीर्थ सहित पूरे जिले में 51 तीर्थ स्थित हैं। शहर में गुरुद्वारा नीम साहिब, अंबकेश्वर मंदिर, हजरत बाबा शाह कमाल कादरी, डेरा बाबा शीतल पुरी, पूंडरी के फतेहपुर में माता मनसा देवी मंदिर, कलायत में कपिलमुनि मंदिर, खंडालवा शिव मंदिर, गुहला में यक्ष अरंतुक स्थल आदि भी दर्शनीय हैं।