जिला आयुर्वेेदिक अधिकारी व उनके कार्यालय के कर्मचारी को फल्गू मेले में दवाओं को एमआरपी से अधिक दरों पर खरीदने की शिकायत में डीसी की गई जांच में दोषी करार दिया गया है। डीसी ने कार्रवाई के लिए विभाग के महानिदेशक को कार्रवाई के लिए पत्र लिखा है।
गांव रसूलपुर निवासी आरटीआई कार्यकर्ता जयपाल ने इस मामले में शिकायत दी थी कि उसने आरटीआई से जानकारी हासिल की थी कि आयुर्वेदिक विभाग ने फल्गू मेले में 15 दिनों में करीब 1.33 लाख रुपये की आयुर्वेदिक दवाएं खरीदीं थीं। जिसमें लोगों को बुखार, खांसी सहित सामान्य बीमारियों के लिए होम्योपैथिक की दवाएं देने की जानकारी दी गई। इसमें पता चला था कि एक दवा जिसका एमआरपी महज 41 रुपये है। उसकी कीमत 545 रुपये बिल में दर्शाई गई है। इसी तरह से कई दवाओं के बैच नंबर, एक्सपायरी डेट भी नहीं है। इसके अलावा अधिकतर दवाओं पर कोई डिस्कांउट नहीं लिया गया। जबकि सरकारी नियम के अनुसार सरकारी खरीद में डिस्कांउट दिया जाता है। इतना ही नहीं बिल के अंदर भी डिस्कांउट 40 प्रतिशत व जीएसटी 5 प्रतिशत दर्शाया गया है। लेकिन दवा की कीमत यदि 545 रुपये है तो उसके लिए एमआरपी, अदा की जाने वाली कीमत भी पूरी 545 रुपये है। डिस्कांउट या जीएसटी का भुगतान के समय कोई ध्यान नहीं रखा गया। उसने इस मामले की शिकायत डीसी कार्यालय कैथल में की थी। जिसमें डीसी ने जांच की। जांच के बाद डीसी ने जिला आयुर्वेदिक अधिकारी पूनम वालिया व उनके कार्यालय के संबंधित कर्मचारी को दोषी करार दिया है।
फर्म ने दोबारा से प्रस्तुत किए जांच में बिल : आरटीआई कार्यकर्ता जयपाल ने बताया कि डीसी की जांच की आरटीआई से ली गई प्रति में जिला आयुर्वेदिक अधिकारी ने दो फर्मों से फिर से बिल बनवाए। शिकायत मिलने के बाद फर्म ने 648 रुपये का एक चेक मेला अधिकारी को जमा करवाया गया है। जबकि इस बात का ध्यान बिल देते समय रखना चाहिए था। इस लापरवाही के लिए जिला आयुर्वेदिक अधिकारी कैथल व उसके कार्यालय का संबंधित कर्मचारी का दोष बनता है। इसकी रिपोर्ट विभाग को प्रेषित है।
इस संबंध में डीसी डा. प्रियंका सोनी का कहना है कि...