अतिथि अध्यापकों ने अपनी मांगों को लेकर शहर में प्रदर्शन किया व हरियाणा प्रदेश में कृषि मंत्री ओम प्रकाश धनखड़ का पुतला फूंका।
प्रदर्शन की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष मास्टर सुभाष चंद ने की। जिलाध्यक्ष ने कहा कि यदि हरियाणा सरकार हाईकोर्ट में गलत आंकडे़ पेश कर 4073 अतिथि अध्यापकों को सरप्लस दिखाकर सरकार ने अध्यापकों को सड़कों पर मारे-मारे फिरने के लिए मजबूर कर दिया है।
अतिथि अध्यापक न्याय नहीं मिलने तक हार नहीं मानेंगे। अध्यापक अपनी रोजी रोटी को बचाने के लिए कोई भी कुर्बानी देने के लिए तैयार है। जब कृषि मंत्री ओम प्रकाश धनखड़ किसान नेता थे, तब उन्हें किसानों और कर्मचारियों का दुख दर्द दिखाई देता था।
सत्ता की चाबी हाथ में आते ही नेता जी उन किसानों और कर्मचारियों को भूल गए। जिनकी बदौलत सत्ता में पहुंचे हैं। उस समय तो किसानों व कर्मचारियों का स्वयं को सबसे बड़ा हितैषी बताया था और सदा ही किसानों को लेकर ही अपनी राजनीति चमकाई है।
यह बहुत ही शर्मनाक है कि सत्ता में आने पर भाजपा अपने सभी वायदों से मुकर गई और अध्यापकों का रोजगार छिन लिया। एक तरफ किसान आत्महत्या कर रहा है। वहीं दूसरी और कृषि मंत्री मात्र 500 रुपये के चैक देकर, उनका मन नाचने को करता है।
हरियाणा राजकीय अध्यापक संघ के चेयरमैन कुलभूषण शर्मा ने अध्यापकों को संबोधित किया व उनकी मांगों का समर्थन किया। हरियाणा सरकार की ओर से सरकार के मंत्री बयान दे रहे है कि सरकार अतिथि अध्यापकों से बातचीत करने को तैयार है।
सरकार की ओर से अभी तक कोई बुलावा नहीं आया है। महिला विंग की प्रधान मीनू देवी व कार्यकारिणी सदस्य कमलदेश देवी ने कहा कि वैसे तो हरियाणा सरकार बेटी बचाओ व बेटी पढ़ाओ का नारा दे रही है। लेकिन वहीं दूसरी ओर बेटियों को रोजगार छिना जा रहा है।
इस अवसर पर पूर्व जिला प्रधान सुनील बुरा, कोषाध्यक्ष शमशेर नैन, महासचिव सतबीर, विकाश, राविश, कृष्ण, मुकेश, मनोज, विनोद, रमेश, देवेंद्र, अंजू, आशा, रामरति, ऋचा, मंजू, बिमला, कविता व सैंकडों की संख्या में अतिथि अध्यापक मौजूद रहे।