कलायत। भारतीय कबड्डी के सफल कोच और द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित बलवान सिंह का रविवार को उनके पैतृक गांव ढुंडवा में भव्य स्वागत किया गया। उनके स्वागत के लिए पूरा गांव उमड़ पड़ा। ग्रामीण उन्हें कलायत से ढोल-नगाड़ों के साथ खुली जीप में गांव लेकर पहुंचे। इस दौरान ग्रामीणों ने उनका जोरदार स्वागत किया और उनकी खेल उपलब्धियों पर गर्व जताया।
भारतीय कबड्डी में अहम योगदान के कारण बलवान सिंह को किंगमेकर भी कहा जाता है। वह भारतीय पुरुष कबड्डी टीम के मुख्य कोच रहे हैं। उनकी कोचिंग में भारतीय टीम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। कबड्डी के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें खेल कोचिंग के सर्वोच्च सम्मानों में शामिल द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया।
भारतीय वायुसेना में फ्लाइट लेफ्टिनेंट रहे बलवान सिंह
बलवान सिंह ने बताया कि कोच बनने से पहले वे स्वयं भारतीय कबड्डी टीम के कप्तान रहे हैं। उन्होंने 1981 से 1993 तक 12 वर्षों तक भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया। खिलाड़ी के तौर पर उन्होंने 1988 की एशियन कबड्डी चैंपियनशिप और 1989 के सैफ खेलों में स्वर्ण पदक जीते। वह भारतीय वायुसेना में फ्लाइट लेफ्टिनेंट के पद पर भी रहे और इसी पद से सेवानिवृत्त हुए।
कोचिंग में स्वर्णिम रहा सफर
बलवान सिंह के मार्गदर्शन में भारतीय कबड्डी टीम ने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन किया। उनकी कोचिंग में भारत ने 2006 के दोहा, 2010 के ग्वांगझू और 2014 के इंचियोन एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीते। कबड्डी विश्व कप में भी उनकी टीम ने 2004, 2007 और 2016 में खिताबी जीत दर्ज की। इसके अलावा भारतीय टीम ने दक्षिण एशियाई खेलों और एशियन इंडोर गेम्स में भी स्वर्ण पदक हासिल किए।
गांव के लोगों के प्यार ने बनाया इस काबिल
बलवान सिंह ने कहा कि उनके गांव के लोगों ने हमेशा उनका मनोबल बढ़ाया। इसी प्रोत्साहन से उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने और खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली। उन्होंने युवाओं से नशे से दूर रहने और खेलों को अपने भविष्य का माध्यम बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवा मेहनत, अनुशासन और लगन के साथ खेलों में आगे बढ़ें और अपने परिवार, गांव व देश का नाम रोशन करें।
भारतीय कबड्डी कोच का भव्य स्वागत करते उनके गांव ढुंडवा के लोग