फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कमरे हैं अनसेफ, खुले आसमान तले लगती है क्लास

Tue, 18 Apr 2017 11:59 PM IST
ब्यूरो कैथ्ाल
विज्ञापन
धर्मशालाओं और किराये के मकानों में चल रहे कई स्कूल - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन
जिले के सरकारी स्कूल बदहाल हैं। जिसके कारण प्रति वर्ष हजारों की संख्या में विद्यार्थी सरकारी स्कूलों से कम होते जा रहे हैं। जिले में कुल 599 स्कूल हैं, जिनमें से 250 से अधिक स्कूलों के 450 कमरे अनसेफ हैं। विद्यार्थियों के बैठने तक की जगह नहीं है। वर्तमान में भी जिले के कई स्कूल धर्मशालाओं, किराये के मकानों में चल रहे हैं। प्राइमरी स्कूलों मेें पिछले दो वर्ष में विद्यार्थियों की संख्या कम होने के कारण 10 से अधिक स्कूलों को बड़े स्कूलों में मर्ज कर दिया गया है। गर्मी के मौसम में सरकारी स्कूलों के बिजली नहीं है। जिसके कारण विद्यार्थियों को अध्यापक पूरे दिन पेड़ों की छाया में बैठाकर शिक्षा देते हैं। यही कारण है कि जहां तीन वर्ष पहले विद्यार्थियों के संख्या एक लाख 50 हजार के आसपास थी वहीं अब एक लाख 10 हजार के करीब रह गई है।
विज्ञापन


250 स्कूलों में 450 कमरे अनसेफ
जिले के करीब 250 स्कूलों में 450 कमरे अनसेफ हैं। स्कूलों में कमरे न होने के कारण विद्यार्थियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। कमरे न होने के कारण विद्यार्थियों को पेड़ की छाया में बाहर खुले आसमान के नीचे कक्षाएं लगानी पड़ती है।

बिजली एक बड़ी समस्या
सरकारी स्कूलों में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों के लिए बिजली एक बड़ी समस्या है। गांव के स्कूलों में बिजली नाम मात्र ही आती है। गर्मी के मौसम में बिना बिजली के कमरों के अंदर बैठना काफी मुश्किल है। स्कूल की छात्रा शीतल शर्मा, मोनिका, पारूल, जसबीर कौर ने बताया कि बिना बिजली के गर्मी में कमरों के अंदर बैठना मुश्किल है। इस कारण बाहर खुले में पेड़ों के नीचे बैठना पड़ता है।
विज्ञापन

 
जनरेटर है, तेल नहीं है
शिक्षा विभाग ने वर्ष 2011 में जिले के स्कूलों में लाखों रुपये की लागत से जनरेटर तो उपलब्ध करवा दिए। लेकिन उसके बाद इसे चलाने के लिए स्कूलों को तेल उपलब्ध नहीं करवाया। जिसके कारण स्कूलों में पड़े जनरेटर धूल फांक रहे हैं। विद्यार्थियों को इसका कोई लाभ नहीं मिल रहा है।

50 साल से किराये के मकान में चल रहे स्कूल
जिले में कई ऐसे स्कूल हैं जो अभी तक धर्मशालाओं और किराये के मकानों में चल रहे हैं। प्राइमरी स्कूल नंबर-3 करीब 50 साल से शहर के बीच में किराये के मकान में चल रहा है। इसके अलावा सीवन गेट स्कूल का भवन पूरी तरह से अनसेफ घोषित कर दिया गया है। यह स्कूल केवल 60 गज की जगह में पिछले 40 वर्ष से चल रहा था। अब विद्यार्थियों की कक्षाएं एक धर्मशाला में लगाई जा रही है।

प्रति वर्ष घट रही है विद्यार्थियों की संख्या
जिले के सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों की संख्या प्रतिवर्ष घट रही है। पिछले करीब तीन साल से करीब 30 हजार विद्यार्थी सरकारी स्कूलों को छोड़ चुके हैं। 3 साल पहले जिले के स्कूलों में करीब एक लाख 50 हजार विद्यार्थी थे। लेकिन अब यह संख्या एक लाख 10 हजार रह गई है। प्रति वर्ष करीब 8 से 10 हजार से अधिक विद्यार्थी सरकारी स्कूल छोड़ जाते हैं।

प्रति वर्ष जिले के सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों की संख्या कम हो रही है। सरकार इस ओर कई अहम कदम उठा रही है। जो स्कूल किराये व धर्मशालाओं के चल रहे हैं, उनके लिए चंदाना गेट पर एक स्कूल बन रहा है। जल्द ही उन स्कूलों को शिफ्ट कर दिया जाएगा। जहां कमरे नहीं हैं, वहां कमरों का निर्माण भी किया जा रहा है।
विज्ञापन

शमशेर सिरोही, डिप्टी डीईओ
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें