चीका में बन रहे सरकारी कन्या कालेज का निर्माण जिस गति से चल रहा है। उससे लगता नहीं कि अगले सत्र में भी क्षेत्र की करीब 4000 से अधिक बेटियों को शहर में ही सरकारी कॉलेज का लाभ मिल सकेगा। इस समय गुहला-चीका के निजी कॉलेज के अलावा कैथल, पिहोवा सहित आस-पास के शहरों में बेटियों को शिक्षा हासिल करनी पड़ रही है। वहीं हजारों बेटियां अधूरी शिक्षा छोड़कर घर बैठने को मजबूर हैं।
गौरतलब है कि अक्तूबर 2014 में सीएम मनोहर लाल खट्टर ने प्रदेश की गद्दी संभाली थी और नवंबर में कैथल में आयोजित अपनी पहली सभा के दौरान विधायक कुलवंत बाजीगर की मांग पर उन्होंने चीका में सरकारी कन्या कालेज खोले जाने को मंजूरी दी थी। तब से लेकर लगातार चली कागजी कार्रवाइयों के चलते कालेज का निर्माण लटकता रहा और पिछले महीने 2 सितंबर को भूमि पूजन के बाद आजकल नींवें भरने का काम चल रहा है।
कक्षाएं शुरू हो सकती थी नहीं हुई
लोगों में नाराजगी इस बात को लेकर है कि कालेज का अपना भवन बनने तक किसी भी अन्य स्कूल या कालेज के भवन में अस्थायी कक्षाएं शुरू हो सकती थी मगर राजनीतिक इच्छाशक्ति के अभाव में शुरू नहीं हो पाई। डीएवी कालेज में इतिहास विभाग के अध्यक्ष पद से रिटायर प्रो. आरएल वधवा कहते हैं कि यह एक आम परंपरा रही है कि जब कहीं कोई शिक्षण संस्थान खोले जाने का एलान होता है तो उस संस्थान की कक्षाएं तत्काल किसी अस्थायी भवन में शुरू कर दी जाती हैं। कैथल का अंबेडकर कालेज और चीका का डीएवी कालेज इस बात के उदाहरण हैं कि कक्षाएं कहीं और शुरू कर दी गई और कालेज के अपने भवन बाद में बने।
13 करोड़ 12 लाख में तैयार होगा भवन
पुलिस हाउसिंग कार्पोरेशन के तत्वावधान में पिहोवा रोड पर डेरा सच्चा सौदा से आगे बनाए जा रहे सरकारी कन्या कालेज पर 13 करोड़ 12 लाख 15 हजार रुपये खर्च किए जाएंगे। कार्पोरेशन के जेई राजेश बंसल ने बताया कि 10 एकड़ से ज्यादा भूमि पर बनने वाले इस कालेज में कुल निर्माण एरिया 1 लाख 10 हजार वर्ग फीट है तथा कालेज का भवन 4 स्टोरी होगा। बंसल ने बताया कि जिस कंपनी को कालेज निर्माण का ठेका दिया गया है उसे हर हाल में 31 मार्च 2018 तक निर्माण पूरा करना होगा।
ऐसे तो एक साल और लगेगा
चीका में कन्या कालेज की घोषणा के बाद कक्षाएं शुरू करने की मांग को लेकर अभियान चलाने वाली संस्था जन जागृति मंच के अध्यक्ष रमेश जैन ने कहा कि अगर सरकार या विधायक इस मसले पर गंभीरता दिखाते तो अप्रैल 2015 में ही चीका के किसी सरकारी या गैर सरकारी भवन में अस्थायी कक्षाएं शुरू हो सकती थी। जैन ने कहा कि उन्होंने शहर के अनेकों शिक्षाविदों के साथ इस बार भी कोशिश की थी। कई बार विधायक से मिले थे ताकि 2016 में ही कक्षाएं शुरू हो सके लेकिन प्रयास सिरे नहीं चढ़े। जैन ने कहा कि इन हालातों में तो पक्का है कि 2017 वाला सेशन भी ऐसे ही गुजर जाएगा।
बहुत महंगी है शिक्षा
डीएवी कालेज चीका में अंग्रेजी विभाग के प्रमुख रहे प्रो. वीके दत्त को इस बात का बड़ा मलाल है कि हरियाणा सरकार लड़कियों को मुफ्त शिक्षा की सौगात दे रही है लेकिन चीका में कोई सरकारी कालेज ना होने के कारण लड़कियां महंगी फीसें देकर पढ़ने पर मजबूर हैं। प्रो. दत्त के अनुसार प्राइवेट कालेज में न्यूनतम 10 से 20 हजार प्रतिवर्ष पढ़ाई का खर्च है। अगर सरकारी कालेज खुल जाए तो बच्चियों को मुफ्त पढ़ने का मौका मिलेगा। इससे ज्यादा से ज्यादा लड़कियों के अभिभावक उन्हें आगे की शिक्षा दिलाने के लिए प्रेरित होंगे।
हर हाल में शुरू करवाएंगे कक्षाएं : विधायक
विधायक कुलवंत बाजीगर ने कहा कि उन्होंने इस साल सरकारी कन्या कालेज की कक्षाएं किसी दूसरे संस्थान के भवन में चालू करवाने की बड़ी कोशिशें की मगर किन्हीं कारणों से बात बनते बनते रह गई। विधायक ने दावा किया कि अगले सेशन में ऐसा नहीं होगा। कालेज कंप्लीट बेशक 2018 में होगा लेकिन उससे पहले कुछ कमरे तो बन ही जाएंगे। वहीं कक्षाएं शुरू करने की मंजूरी लाई जाएगी।
रिटायर्ड शिक्षकों ने की मुफ्त पढ़ाने की पेशकश
डीएवी कालेज चीका के इतिहास शिक्षक रहे प्रो. आरएल वधवा ने कहा कि उन्होंने अपने साथी प्राध्यापकों के साथ विधायक को पेशकश की है कि अगर वे कालेज की कक्षाएं चालू करवाने की मंजूरी लेकर आएं तो जब तक स्थायी स्टाफ की व्यवस्था नहीं हो जाती तब तक वे बच्चियों को मुफ्त पढ़ाने के लिए तैयार हैं। वधवा ने बताया कि अंग्रेजी के प्रो. वीके दत्त, इकनॉमिक्स के प्रो. गुरदीप सिंह, पंजाबी के प्रो. रणधीर सिंह धालीवाल सहित तकरीबन सभी विषयों के सेवानिवृत्त कालेज शिक्षा अपनी सेवाएं देने को तैयार हैं।