कैथल। गुहला से निकलने वाली घग्गर नदी का जलस्तर पिछले 24 घंटे में घटकर 11.3 फीट पर आ गया है। 3.6 फीट जलस्तर घटने पर प्रशासन और सिंचाई विभाग ने राहत की सांस ली है। रविवार को जलस्तर 14.9 फीट तक पहुंचने पर प्रशासन के साथ क्षेत्र के 100 से ज्यादा गांवों के ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई थी। सिंचाई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मारकंडा और टांगरी नदी के जलस्तर में भी लगातार गिरावट आ रही है और इन्हीं दोनों नदियों का पानी घग्गर नदी में डाला जाता है। खतरे को देखते हुए विभाग हर दो घंटे में घग्गर का जलस्तर और इसके बहाव को माप रहा है, ताकि किसी भी प्रकार के खतरे से पहले ही उससे निपटा जा सके और तैयारियां की जा सकें।
घग्गर में 23 फीट के ऊपर जलस्तर पहुंचने पर ही खतरा माना जाता है, क्योंकि इससे कम जलस्तर और बहाव क्रीक जो बीच में नाला बना होता है तक ही सीमित रहता है, लेकिन जैसे ही जल स्तर 23 फीट को पार करता है यह क्रीक को पार कर खेतों में घुस जाता है और फिर धीरे-धीरे ये बाढ़ का रूप धारण कर लेता है। यही कारण है कि अभी गुहला क्षेत्र में कहीं भी घग्गर में मिट्टी कटाव जैसी कोई घटना सामने नहीं आई है। हालांकि सिंचाई विभाग 4 पोकलेन मशीन और 2 जेसीबी के माध्यम से लगातार सफाई और संभावित कटाव वाली जगहों पर किनारों को मजबूत करने में लगा है। संवाद
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घग्गर के जल स्तर में लगातार गिरावट आ रही है। सोमवार को यह घटकर 11.3 फीट पर आ गया है जो खतरे के निशान से बहुत नीचे है। बारिश नहीं होने पर अगले एक या दो दिन में ये और घट जाएगा। अभी बाढ़ जैसा कोई खतरा नहीं है, लेकिन विभाग लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और हर 2 घंटे में जलस्तर व बहाव मापा जा रहा है।
- अजमेर सिंह, एसडीओ, गुहला, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग, कैथल।