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फुटबाल में मानस की बेटियां कर रही हैं नाम रोशन

Sun, 01 Jan 2017 11:26 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, कैथ्ाल
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football - फोटो : कैथ्‍ाल
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अमर उजाला ब्यूरो
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कैथल। प्रदेश की बेटियां बॉक्सिंग और रेसलिंग में उत्कृष्ट खेल के माध्यम से अपने प्रदेश और देश का नाम रोशन कर रही हैं। वहीं गांव मानस की बेटियां फुटबाल के मैदान में कई घंटों तक पसीना बहा बुलंदियों का आसमां छू रही हैं। गांव में वर्ष 2011 के बाद फुटबाल खेल की ऐसी लोकप्रियता बढ़ी कि यहां की खिलाड़ियों ने महज छह सालों में कुल 18 मेडल हासिल किए हैं। जिसमें 8 गोल्ड, 5 सिल्वर और 5 ब्रांज मेडल शामिल है। अब तक गांव की 14 बेटियां राष्ट्रीय स्तर पर अपने खेल का प्रदर्शन कर चुकी है। जिसमें 4 खिलाड़ी ऐसी हैं जो चार बार राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन करके अपने खेल का लोहा मनवा चुकी है।


खिलाड़ियों का कहना है कि उन्हें इस खेल से कोई वास्ता नहीं था। लेकिन जब स्कूल में उनके डीपी दिलबाग ने उन्हें मैदान में उतारा और फुटबाल थमा दी। उसके बाद से ही इस खेल के प्रति उनका रुझान बढ़ा और वह फुटबाल खेलने लगी। गांव में फुटबाल का मैदान भी नहीं है। जिसमें वह प्रैक्टिस कर सके। उसके बावजूद उनके कोच द्वारा स्कूल में ग्राउंड की व्यवस्था की गई है। लेकिन वह भी पूरी तरह से तैयार नहीं और खिलाड़ी बिना घास व गीले मैदान में भी खूब पसीना बहा रही है।
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राष्ट्रीय स्तर पर खिलाड़ी रीतू, शीतल, अंजली, तमन्ना, पिंकी, सोनिया, सुदेश, तनू व प्रवीन कुमारी ने बताया कि समाज में बेटियों को गर्भ में मारकर ही उसे जन्म का मौका नहीं दिया जाता। लेकिन इतनी विपरीत परिस्थितियों के बाद भी बेटियां हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा के माध्यम से पूरे विश्व में अपने देश का नाम चमका रही है। उन्होंने कहा कि समाज को अपनी विचारधारा को बदलकर बेटियों की तरक्की के लिए कार्य करने चाहिए। जिससे वह देश के लिए बुंलदियों को छू सके।

राष्ट्रीय टीम में बनाई जगह
कोच दिलबाग ने बताया कि गांव की बेटियां तीन वर्गों की टीम में हर वर्ष राष्ट्रीय स्तर पर सात से नौ खिलाड़ियों का चयन होता है। इसमें अंडर-14, 17 और 19 आयु वर्ग में अपने खेल का प्रदर्शन करती हैं। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों द्वारा खेल मंत्री अनिल विज से मिलकर गांव में फुटबाल की खेल नर्सरी खेलने के लिए आग्रह किया गया। लेकिन अभी तक इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया।
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ग्रामीण करते हैं सहयोग, पर पंचायत नहीं
ग्रामीण कर्मबीर, सुरेंद्र, रमेश, बृजपाल ने बताया कि बेटियों के खेल के लिए गांव में कोई भी खेल स्टेडियम नहीं है। जहां पर फुटबाल का मैदान बन सके। उन्होंने कहा कि बेटियों के माता पिता मेहनत मजदूरी के माध्यम से अपनी बेटियों को प्रोत्साहित कर रहें हैं। लेकिन गांव की पंचायत के माध्यम से कोई भी सहायता नहीं मिल रही।
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