संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। इंग्लैंड भेजने के नाम पर लाखों रुपये ठगी मामले में इकनॉमिक सेल ने दो मामलों में वांछित आरोपी को काबू किया है। इनमें इकनॉमिक सेल प्रभारी इंस्पेक्टर चंद्रभान की अगुवाई में पीएसआई संदीप कुमार ने पंजाब के जिला रूपनगर के कमालपुर निवासी आरोपी गुरविंद्र सिंह को दबोचा है।
पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि गांव सिरटा निवासी रोशन लाल ने शिकायत दी थी कि वह और उसका जानकार अनिल कुमार अपने बच्चों को विदेश भेजना चाहते थे। इस संबंध में उन्होंने मार्च 2024 में चंडीगढ़ में प्लैनेट गाइड ओवरसीज सेंटर में हरसिमरन जीत कौर और नेहा राणा से बातचीत की। उन्होंने विदेश जाने वाले युवा गुरदीप सिंह और आरती के सारे दस्तावेज ले लिए।
उन्होंने पूरी तसल्ली दी कि वे दोनों बच्चों को पति-पत्नी के रूप में इंग्लैंड का वीजा लगवा देंगे। इसमें लड़की का मेरिज रजिस्ट्रेशन करवाकर दोनों का कपल वीजा लगा देंगे। इसके लिए उन्होंने 24 लाख रुपये मांगे। नेहा राणा और हरसिमरन जीत कौर ने उनसे 10 लाख रुपये ले लिए। रुपये देने के बाद उन्हें पता चला कि दो आरोपियों ने कोई फाइल नहीं लगाई। रुपये वापस मांगने पर जान से मारने की धमकी
दी गई।
थाना सीवन में यह केस दर्ज कराया गया था। जांच के दौरान खुलासा हुआ कि उक्त वारदात में आरोपी गुरविंद्र उपरोक्त मुख्य आरोपी है जो चंडीगढ़ में प्लैनेट गाइड ओवरसीज सेंटर चला रहा था। आरोपी किसी अन्य मामले में कुरुक्षेत्र जेल में बंद था। जिसकी उक्त मामले में गिरफ्तारी के लिए न्यायालय की मार्फत प्रोडक्शन वारंट जारी करवाए गए थे। जिसको प्रोडक्शन वारंट पर लेकर न्यायालय से एक दिन पुलिस रिमांड हासिल किया गया। आरोपी के कब्जे से 20 हजार रुपए बरामद किए गए।
पुलिस प्रवक्ता ने बताया विदेश भेजने के नाम पर धोखाधड़ी करने के एक अन्य मामले की जांच दौरान भी पीएसआई संदीप कुमार ने आरोपी गुरविंद्र को न्यायालय से नियमानुसार गिरफ्तार कर लिया गया। बता दें कि डिफेंस कॉलोनी कैथल निवासी हितेश की शिकायत के अनुसार थाना सिविल लाइन में गुरविंद्र सिंह, मोहाली निवासी अनमोल, सीरत, साहिल और बलविंद्र के विरुद्ध मामला दर्ज किया गया था।
शिकायत के अनुसार, अगस्त 2024 में आरोपियों का उसके पास फोन आया था और उसे कनाडा भेजने की बात कही थी। कनाडा भेजने को लेकर उससे 16 लाख मांगे, लेकिन 14 लाख रुपये में बात तय हो गई थी। नवंबर में उससे करीब साढ़े चार लाख रुपये अलग-अलग तारीख में ले लिए थे। उसे एक वीजा दिया गया था, जो जांच के दौरान फर्जी पाया गया था। उसने आरोपियों से रुपये वापस मांगे धमकी दी गई।