संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। दशहरा पर्व पर मंगलवार को भगवान हनुमान के स्वरूपों ने दंडवत परिक्रमा की। साथ ही पूजा करने वाली समितियों की ओर से घर-घर जाकर फेरी निकाली। दशहरे के दिन लोग भगवान हनुमान के स्वरूपों को अपने घरों में निमंत्रण देकर उनकी पूजा-अर्चना करते हैं और प्रसाद वितरित करते हैं।
मंगलवार को भी शहर में विभिन्न समितियों के सदस्यों ने शहर में भगवान हनुमान का स्वरूप धारण कर परिक्रमा की। इसके तहत शहर के लोगों ने भी हनुमान जी का आशीर्वाद लिया। शहर में करीब 50 वर्ष पहले इस परंपरा को शुरू किया था। शहर में प्रताप गेट स्थित श्री हनुमान सेवा समिति सबसे अधिक पुरानी है। इस समिति की शुरुआत बिल्ला भगत ने की थी। शहर में 25 से अधिक समितियां भगवान हनुमान के चलिया व्रत के नियम का पालन किया करती हैं।
यह है हनुमान स्वरूपों के चलिया का इतिहास ः समिति के सदस्य आदिश जैन व कमल मक्कड़ ने बताया कि आजादी से पहले पाकिस्तान में लैय्या समाज जो पंजाबी समुदाय से संबंध रखते हैं। उन्होंने दशहरा पर भगवान हनुमान के स्वरूप धारण करने की परंपरा शुरू की थी। इस परंपरा का निर्वहन मन्नत पूरी होने पर किया जाता था। जब आजादी के बाद भारत-पाकिस्तान का बंटवारा हुआ तो इस समुदाय के लोग भगवान हनुमान के इन स्वरूपो को पानीपत में साथ लेकर आए थे। इसके बाद सबसे पहले पानीपत और फिर बाद में कैथल व करनाल में यह परंपरा निभाई जाने लगी।
गौरतलब है कि इस यात्रा में समितियों के वह युवा हिस्सा लेते हैं, जो दशहरे से पहले 41 या 21 दिन तक ब्रह्मचर्य धारण कर घर और व्यवसाय त्यागकर व्रत रखते हैं। अंतिम दिन भंडारा होता है। स्वरूप धारण करने वाले युवा शहर की परिक्रमा पूरी करने के बाद अंत में स्वरूप रावण के पुतले पर सोटा मारते हैं। इसके बाद यह प्रक्रिया समाप्त होती है। दशहरा के बाद हनुमान स्वरूपों का हरिद्वार में गंगा जी में विसर्जन करने जाते हैं। इसके बाद वापस आकर भंडारे का आयोजन कर व्रत खोलते हैं। सर्राफा बाजार प्राचीन हनुमान मंदिर के पास श्री संकट मोचन सेवा समिति ने शहर में दंडवत परिक्रमा की। समाजसेवी लाजपत राय सिंगला विशिष्ट अतिथि रहे। इस मौके पर प्रधान दीक्षित बंसल रजत थरेजा, रजत कुमार, अभिषेक गोयल, रजत रहेजा, भावेश, विशाल, संकल्प खुराना, वरुण गोयल, राहुल पाल, कुशल जैन आदि मौजूद रहे। संवाद