संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। पशुपालन एवं डेयरी विभाग कैथलके उपनिदेशक डॉ. सूर्या खटकड़ ने बताया कि पशुधन को संक्रामक और जानलेवा बीमारियों से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से 11 मई से खुरपका-मुंहपका रोग (एफएमडी) और गलघोटू रोग (एचएस) के विरुद्ध विशेष संयुक्त टीकाकरण अभियान शुरू किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि यह अभियान लगभग एक माह तक जिले के सभी गांवों, ढाणियों और पशुपालन क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर चलाया जाएगा। अभियान का मुख्य उद्देश्य पशुओं को गंभीर बीमारियों से बचाकर पशुपालकों को आर्थिक नुकसान से सुरक्षित रखना और जिले में स्वस्थ एवं उत्पादक पशुधन का विकास सुनिश्चित करना है।
डॉ. सूर्या खटकड़ ने बताया कि खुरपका-मुंहपका रोग (एफएमडी) पशुओं में तेजी से फैलने वाली अत्यंत संक्रामक बीमारी है, जो मुख्य रूप से गाय, भैंस, बकरी और अन्य खुर वाले पशुओं को प्रभावित करती है। इस बीमारी से पशुओं में तेज बुखार, मुंह में छाले, पैरों में घाव, चलने-फिरने में कठिनाई और दुग्ध उत्पादन में भारी गिरावट देखने को मिलती है।
उन्होंने बताया कि गलघोटू रोग (एचएस) गंभीर जीवाणु जनित बीमारी है, जो मौसम परिवर्तन के दौरान तेजी से फैलती है। समय पर उपचार न मिलने पर यह बीमारी पशुओं की मृत्यु का कारण भी बन सकती है। दोनों रोगों का सीधा असर पशुपालकों की आय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
एफएमडी एवं एचएस संयुक्त टीकाकरण अभियान के तहत कैथल के लिए कुल 3 लाख 31 हजार 980 वैक्सीन डोज उपलब्ध करवाई गई हैं। इस विशेष अभियान के अंतर्गत चार माह से अधिक आयु के सभी गाय और भैंसों का नि:शुल्क टीकाकरण किया जाएगा। विभाग की पशु चिकित्सा टीमें गांव-गांव जाकर टीकाकरण कार्य पूरा करेंगी, ताकि कोई भी पात्र पशु अभियान से वंचित न रहे। टीकाकरण से पहले पशुओं का आधार आधारित ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से पंजीकरण किया जाएगा। इससे टीकाकरण का रिकॉर्ड पारदर्शी और सुव्यवस्थित तरीके से संधारित किया जा सकेगा। -डॉ. सूर्या खटकड़, उपनिदेशक