संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय में आश्रम प्रमुख रेखा ने श्रद्धालुओं को जीवन जीने की श्रेष्ठ कला व स्वाध्यायक की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि क्यों, क्या, कौन, कब और कैसे? ये ही पांच शब्द हमें पूरा जीवन परेशान करते हैं।
उन्होंने बताया कि दादी हृदयमोहिनी के बचपन का नाम शोभा था। बाद में बाबा ने उन्हें हृदयमोहिनी व गुलजार नाम दिए। जब नौ वर्ष की थीं तब संस्था के साकार संस्थापक ब्रह्मा बाबा द्वारा खोले गए ओम निवास बोर्डिंग स्कूल में दाखिला लिया। बचपन से ही विशेष योग साधना के चलते दादीजी का व्यक्तित्व इतना दिव्य हो गया था कि उनके पास में आने वाले लोगों को उनकी तपस्या और साधना की अनुभूति होती थी। उनके चेहरे पर तेज का आभामंडल उनकी तपस्या की कहानी साफ बयां करता था।
रेखा ने कहा कि दादीजी कहती थीं कि जीवन में परेशान होने के लिए मात्र पांच शब्द हैं। क्यों, क्या, कौन, कब और कैसे? ये ही पांच शब्द हमें पूरा जीवन परेशान करते हैं। क्यों कहा और व्यर्थ संकल्पों की क्यूं चालू हो जाती है। इसने ये कहा, उसने ये कहा और मन में व्यर्थ संकल्प चालू हो जाते हैं क्योंकि जो बीत चुका वह हमारे हाथ में नहीं है।
आश्रम संचालिका रेखा ने कहा कि सामान्य जीवन में स्वयं खुश रहना और सभी का स्वागत करना एक स्वस्थ जीवन की निशानी है। घर पर आए मेहमान की सेवा करने और द्वार पर आए भिक्षु को दान देने से घर में भंडार सदैव भरे रहते हैं। उन्होंने कहा कि इस सृष्टि में कुछ भी स्थाई नहीं है।
उन्होंने कहा कि हम इस सृष्टि में एक मेहमान के तौर पर आए हैं। उन्होंने शिविर में श्रद्धालुओं को प्रभु भक्ति के रहस्यों से अवगत करवाया और भक्ति में प्रेम की अनुभूति कैसे हो इसके बारे में भी विस्तार से व्याख्यान दिया। कार्यक्रम की समाप्ति पर उपस्थित सभी श्रद्धालुओं ने एक साथ बैठ कर भोजन ग्रहण किया।