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Kaithal News: 14 जुलाई को पांच और बसें होंगी जर्जर घोषित, रोडवेज का बेड़ा घटकर 175 रह जाएगा

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बस अड्डा पर खड़ी बसें। संवाद
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कैथल। रोडवेज डिपो के बेड़े में बसों की संख्या एक बार फिर घटने जा रही है। 14 जुलाई को पांच बसें 10 वर्ष की निर्धारित वैधता पूरी करने के बाद जर्जर घोषित कर रूटों से हटा दी जाएंगी। इनके हटने से विशेष रूप से लोकल रूटों और स्कूल-कॉलेज जाने वाले विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
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विभाग के आंकड़ों के अनुसार इसके बाद डिपो में कुल बसों की संख्या घटकर 175 रह जाएगी। इनमें 152 रोडवेज की नियमित बसें और 23 किलोमीटर स्कीम की बसें शामिल होंगी। अगस्त से अब तक कैथल डिपो की कुल 70 बसें जर्जर घोषित हो चुकी हैं। आंकड़ों के अनुसार अगस्त में 12 बसें, सितंबर में 30, अक्तूबर में 12, दिसंबर में नौ और जनवरी में सात बसों ने निर्धारित वैधता पूरी कर ली थी, जिन्हें रूटों से हटा दिया गया। यात्री राजेंद्र, मनोज और सुभाष का कहना है कि कैथल डिपो से जींद, कुरुक्षेत्र, करनाल, दिल्ली, असंध सहित कई महत्वपूर्ण रूटों पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्री सफर करते हैं।
बसों की संख्या कम होने के कारण इन मार्गों पर निर्धारित समय के अनुसार संचालन प्रभावित हो रहा है। दोपहर और शाम के समय कई रूटों पर बसों का इंतजार लंबा हो गया है, जबकि कुछ स्थानों पर फेरे भी कम कर दिए गए हैं। पहले जहां निर्धारित समय पर बसें उपलब्ध हो जाती थीं, वहीं अब यात्रियों को काफी देर तक इंतजार करना पड़ रहा है। नौकरीपेशा लोगों, विद्यार्थियों और दैनिक यात्रियों को समय पर गंतव्य तक पहुंचने में परेशानी हो रही है। कई लोग मजबूरी में निजी वाहनों का सहारा लेकर अतिरिक्त किराया खर्च कर रहे हैं। यात्रियों ने सरकार और रोडवेज मुख्यालय से जल्द नई बसें उपलब्ध कराने और प्रमुख रूटों पर नियमित और पर्याप्त बस संचालन सुनिश्चित करने की मांग की है।
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250 बसों की जरूरत, 75 बसों की कमी
जिले की आबादी, यात्रियों की संख्या और संचालित रूटों को देखते हुए कैथल डिपो को करीब 250 बसों की आवश्यकता है। वर्तमान में डिपो के पास 175 बसें ही उपलब्ध हैं। इससे करीब 75 बसों की कमी बनी हुई है। इस कमी का सीधा असर सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर पड़ रहा है।

तकनीकी जांच के बाद हटाई जाती हैं पुरानी बसें
रोडवेज विभाग के अनुसार निर्धारित सेवा अवधि पूरी करने वाली बसों का मुख्यालय की तकनीकी टीम निरीक्षण करती है। जांच में सुरक्षा मानकों पर खरी नहीं उतरने वाली बसों को जर्जर घोषित कर बेड़े से बाहर कर दिया जाता है, ताकि यात्रियों की सुरक्षा से कोई समझौता न हो।
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मुख्यालय को भेजी है मांग
मुख्यालय को नई बसों की मांग भेज रखी है। जल्द नई बसें डिपो में शामिल होगी। लोगों को आने- जाने में परेशानी नहीं आने दी जाएगी।
अनिल कुमार, वर्कशॉप मैनेजर कैथल
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