सात वाहनों को मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने सोमवार को सीटीओ चौक शिमला से हरी झंडी दिखाकर प्रदेश के कई क्षेत्रों के लिए भेजा।
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दीपावली के मद्देनजर जिले में आग लगने की स्थिति में आग पर काबू करने के लिए विभाग में कर्मचारियों की भारी कमी है। साथ ही पूंडरी, कलायत व राजौंद में लंबी मांग के बावजूद आज तक दमकल की सेवाएं शुरू नहीं हो पाई हैं।
जिला में आग पर काबू पाने के लिए कुल 9 गाड़ियां हैं। जिनमें तीन गाड़ियां छोटी है और उनमें बड़ी गाड़ियों से आधा पानी होता है। इन दस गाड़ियों में 7 कैथल में है तो 2 चीका में लेकिन पूंडरी और कलायत में फायर बिग्रेड की एक भी गाड़ी नहीं है। जिससे इन क्षेत्रों में आग लगने की स्थिति में उस काबू करने के लिए वहां पर पहुंचने में काफी समय लगेगा।
कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है विभाग
इस समय कैथल जिला में केवल 38 कर्मचारी तैनात हैं। जबकि नियमों के मुताबिक 162 कर्मचारी होने चाहिए। यह संख्या लगभग एक चौथाई भी नहीं बनती। ऐसे में विभाग को आग को काबू कर पाने के लिए कर्मचारियों की कमी विभाग को खलेगी और उन्हें इस पर कड़ी मशक्कत करनी पड़ सकती है।
तंग गलियों के लिए पाइपों का सहारा
भीड़ भाड़ वाले क्षेत्रों में आग लगने की स्थिति पर काबू पाने के लिए विभाग के पास पाइपों का विशेष प्रबंध है । भीड़ वाले क्षेत्र में आग लगने की स्थिति में 100-100 फुट के पाइप है। जिनकी संख्या एक हजार के करीब है यह एक अच्छी बात है। इसके अलावा गाड़ियों में रखे जाने वाले एंस्टीग्यूसर सिलेंडरों की संख्या गाड़ियों की संख्या के तरह पूरी है। इनकी संख्या 35 हैं, एक गाड़ी में 5 एंस्टीग्यूसर सिलेंडर रखे जाते हैं।
पूंडरी, राजौंद व कलायत में नहीं हैं दमकल सेवाएं
जिले में कैथल व गुहला-चीका में ही दमकल सेवाएं हैं। वहीं जिला मुख्यालय से करीब 28 किलोमीटर दूर