संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक डॉ. सुरेंद्र सिंह यादव ने बताया कि वायु गुणवत्ता आयोग भारत सरकार और उच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार आगामी गेहूं कटाई सीजन में अग्निकांडों पर रोक लगाने के लिए जिला प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।
उन्होंने बताया कि इस संबंध में संयुक्त निदेशक हरियाणा, पंचकूला द्वारा प्रदेश के सभी सहायक कृषि अभियंताओं की बैठक भी बुलाई गई, जिसमें आगामी सीजन में फसल अवशेषों में अग्निकांड की घटनाओं को पूरी तरह रोकने के लिए व्यापक कार्य योजना तैयार की गई। सभी फील्ड अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अभी से गांव-गांव जाकर तैयारी शुरू करें तथा शिविर लगाकर किसानों को जागरूक करें।
डॉ. यादव ने बताया कि जिले में इस बार लगभग 4 लाख 20 हजार एकड़ क्षेत्र में गेहूं की बुवाई की गई है, जिससे करीब 6 लाख 75 हजार मीट्रिक टन फसल अवशेष निकलता है। इसका प्रबंधन अधिकतर किसान स्ट्रा रीपर मशीन से तुड़ी बनाकर करते हैं, जिसका उपयोग पशुओं के चारे के रूप में किया जाता है। यह तुड़ी पशुओं के लिए उत्तम चारा मानी जाती है। उन्होंने बताया कि कुछ किसान स्ट्रा रीपर से तुड़ी बनाने के बाद मेढ़ों एवं खेतों में बचे हुए अवशेषों में आग लगा देते हैं, जिससे वातावरण प्रदूषित होता है, भूमि की उर्वरा शक्ति कमजोर होती है और जान-माल के नुकसान की आशंका बढ़ जाती है। इसलिए सभी किसानों को जागरूक किया जा रहा है।
गेहूं के अवशेषों के सही प्रबंधन को लेकर किसानों को अधिक से अधिक जागरूक करने के लिए विशेष निर्देश जारी किए गए हैं, ताकि जिले में अग्निकांड की एक भी घटना न हो।
-जगदीश मलिक, सहायक कृषि अभियंता इंजीनियर