कैथल। त्योहारी सीजन में खाद्य पदार्थों की धीमी सैंपलिंग आम आदमी के स्वास्थ्य पर भारी पड़ने वाली है। नवरात्र पर्व गुजर चुका है और दीपावली सिर पर है। विभाग की कार्रवाई का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब तक केवल 22 सैंपल लिए गए हैं। इन सैंपलों की रिपोर्ट जब तक आएगी तब तक त्योहार निकल चुके होंगे।
बता दें कि सैंपल के बाद रिपोर्ट आने में कम से कम 15 से 25 दिन लगते हैं। इस समय सैंपल तो लिए जा रहे हैं, लेकिन रिपोर्ट दिवाली के बाद ही आएगी। ऐसे में मिलावटखोर अपना स्वार्थ साध चुके होंगे। अधिकारियों का कहना है कि सैंपलिंग का काम जारी है।
जुर्माना देकर बच जाते है मिलावटखोर
गौरतलब है कि शहर में प्रतिवर्ष मिलावटी मिठाइयों के मामले सामने आते रहे हैं, लेकिन अधिकतर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी उस समय जांच अभियान चलाते हैं जब दुकानदार बड़े पैमाने पर मिठाइयों को बेच चुके होते हैं। ऐसे में मिलावटी मिठाइयों से लाखों-करोड़ों कमाने वाले मिलावटखोर विभाग को 10-20 हजार रुपये जुर्माना देकर साफ बच निकलते हैं और फिर से उसी धंधे पर जुट जाते हैंं।
इसका खामियाजा गरीब और मध्यम वर्गीय को ही उठाना पड़ता है। यही कारण है कि पर्व के बाद अस्पतालों में अचानक भीड़ बढ़ जाती है। पर्व के मौसम में मिठाइयों की खपत कई गुना बढ़ जाती है। यह 25 से 30 फीसद तक बढ़ोतरी होती है। यदि बात करें नियमों की तो मिठाई की ट्रे पर तिथि अंकित करने का निर्देश दिए हैं लेकिन ऐसा नहीं होता।
मिलावट पकड़ चुकी सीएम फ्लाइंग
बता दें कि पिछले सालों में कैथल में मिलावटी खाद्य पदार्थों के दर्जनों मामले सामने आ चुके हैं। कैथल में जहां मिलावटी पनीर और निम्न स्तर के रसगुल्ले मिल चुके हैं तो वहीं सीएम फ्लाइंग ने मिलावटी आचार की फैक्ट्री भी पकड़ी थी। विभागीय आंकड़ों के अनुसार इस साल अब तक 32 सैंपल सब स्टैंडर्ड और पांच अनसेफ पाए गए हैं।
ऐसे करते हैं मिलावट
मावे में उबला आलू और मैदा की बड़ी मात्रा से मिठाई तैयार कर ली जाती है। मिठाइयों में ग्लूकोज का पाउडर, बेसन, सूजी, मैदा मिलाकर बाजार में खपत होती है। बाजारों में मिलने वाली पैक मिठाइयों की भी एक्सपायरी तिथि अवश्य जांच लें। स्वाद खराब होने पर तुरंत शिकायत करें।
बढ़ती हैं पेट की बीमारियां
जिला नागरिक अस्पताल के डाॅ. आरडी चावला ने बताया कि त्योहार में लोग पकवान और मिठाइयों को सेवन करते हैं। अगर यह मिलावटी है तो उसका शरीर के विभिन्न अंगों पर विपरीत प्रभाव पड़ता है और वे बीमार हो जाते हैं। मिलावटी मिठाई और अन्य भोज्य पदार्थ में इस्तेमाल केमिकल और सामग्रियों का शरीर के विभिन्न अंगों पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। इसके सेवन से एलर्जी, उल्टी और दस्त की समस्या होती है। यह तात्कालिक है लेकिन लंबे समय में किडनी, गुर्दे और लीवर पर गंभीर असर पड़ता है।
नियमित देते हैं दबिश : डाॅ. पवन
खाद्य सुरक्षा अधिकारी डाॅ. पवन चहल ने बताया कि मिठाइयों की गुणवत्ता जांच के लिए समय-समय पर छापेमारी की जाती है। इस साल भी छापेमारी कर नमूने लिए जा रहे हैं। लोगों के सेहत के साथ खिलवाड़ करने पर दुकानदारों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
प्रदेशभर में सैंपल जांचने की केवल दो लैब
कैथल। त्योहारों के चलते बाजाराें में नियमों को ताक पर रखकर मिठाइयां और अन्य खाद्य पदार्थ बेचे जा रहे हैं। इधर, जिला खाद्य सुरक्षा विभाग सैंपलिंग तो कर रहा है लेकिन अभी तक एक सप्ताह में लिए गए सैंपल की जांच रिपोर्ट भी नहीं आ सकी है। इसका मुख्य कारण लैब की कमी है। पूरे प्रदेश में 22 जिलों की जांच के लिए सिर्फ दो ही लैब उपलब्ध है। इसमें एक करनाल और दूसरी चंडीगढ़ में स्थित है। इसलिए सैंपल की रिपोर्ट आने में समय अधिक लगता है। ऐसे में लोगों की सेहत सुरक्षा पर बड़ा सवाल है। अब जिला खाद्य सुरक्षा विभाग ने छावनी और अंबाला सिटी से 22 सैंपल लिए हैं। सोमवार को भी विभाग के अधिकारी मिठाई के सैंपल का कार्य करेंगे।
बेस्ट बिफोर यूज का टैग समाप्त
2020 में मिठाई विक्रेताओं पर नकेल कसने के लिए बैस्ट बिफोर टैग नियम जारी किया गया था। इसके तहत मिठाई विक्रेता मिठाइयों पर उनको खाने की अंतिम तारीख लिखेगा लेकिन यह नियम अब समाप्त कर दिया है। जिला अंबाला में कुछ विक्रेताओं को छोड़कर मिठाई विक्रेता कोई नियम नहीं मान रहे हैं और बिना डर के मिठाइयां बेच रहे हैं।
इस प्रकार होती है कार्रवाई
अगर मिठाई की रिपोर्ट नकारात्मक आती है तो उसमें एडीसी और जिला न्यायालय में केस चलाया जाता है। बिना मानकों के बेचा जाता है तो वह मामला एडीसी कार्यालय में जाता है। यहां पर जुर्माना लगाया जाता है। अगर मिठाई खाने लायक न हो और उसमें खतरनाक पदार्थों की मिलावट हो तो वह मामले कोर्ट में जाते हैं। जिला अंबाला में 25 मामले कोर्ट और 15 मामले एडीसी कार्यालय में चल रहे है।