संवाद न्यूज एजेंसी
ढांड/राजौंद। कृषि विभाग ढांड की ओर से फरल गांव में किसान सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में एडीओ डॉ. राम प्रकाश और डॉ. नरेंद्र ने शिरकत की। दोनों विशेषज्ञों ने किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन विषय पर विस्तार से जानकारी दी। डॉ. राम प्रकाश ने कहा कि धान के अवशेष में आग लगाने से भूमि की उपजाऊ शक्ति घटती है।
उन्होंने इसी वजह से किसानों से कहा कि धान की कटाई के बाद खेत में अवशेषों को जलाना नहीं चाहिए। अवशेषों में आग लगाने से फसलों के मित्र कीट भी जलकर खत्म हो जाते हैं। इससे पैदावार में भारी कमी आती है। उन्होंने कहा कि धान के अवशेष जलाने से वातावरण भी प्रदूषित होता है, जो मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
डॉ. नरेंद्र ने कहा कि किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के लिए वैज्ञानिक और आधुनिक तकनीक अपनानी चाहिए। इसके लिए सरकार द्वारा प्रति एकड़ के हिसाब से प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है। उन्होंने यह भी बताया कि फसल अवशेष में आग लगाने वाले किसानों पर 5,000 रुपये से 30,000 रुपये तक जुर्माना और सजा दोनों हो सकती है।
कार्यक्रम में बागवानी विभाग से करनदीप सिंह ने किसानों को विभिन्न जानकारियां दीं। वहीं, पशुपालन विभाग से डॉ. सुनील राज और डॉ. प्रवेश कुमारी ने विभाग की योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम की अध्यक्षता एएसओ बलकार सिंह ने की।
उधर, राजौंद के जखौली, कोटड़ा, नंद कर्ण माजरा व सौंगल गांवों का फसल अवशेष प्रबंधन के नोडल अधिकारी ने दौरा किया। उन्होंने किसानों को बताया कि इनको भूमि में मिलाने से जमीन की उपजाऊ शक्ति बढ़ती है और फसल बीमारी से भी बची रहती है। इसके अलावा किसानों को अवगत करवाया कि अगर कोई किसान फसल अवशेष में आग लगाता पाया गया तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। वह किसी भी सरकारी लाभ से वंचित रहेगा और न ही किसान अपनी फसल बेच पाएगा। इस दौरान कृषि विभाग,राजस्व विभाग के अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।