कलायत। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की ओर से गांव कैलरम और कुराड़ में एक दिवसीय प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण व किसान जागरूकता गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में किसानों को बताया गया कि रासायनिक उर्वरकों व जहरीले कीटनाशकों के अंधाधुंध प्रयोग से मिट्टी की उर्वरता, जैविक कार्बन और लाभकारी सूक्ष्मजीव लगातार समाप्त हो रहे हैं। यदि समय रहते प्राकृतिक खेती की ओर कदम नहीं बढ़ाए गए तो हमारी उपजाऊ भूमि धीरे-धीरे बंजर होने लगेगी जिससे खेती की लागत बढ़ेगी, उत्पादन क्षमता घटेगी और आने वाली पीढ़ियों के लिए मिट्टी का स्वास्थ्य गंभीर रूप से प्रभावित होगा।
डॉ. रमेश समध्यान, सहायक प्रौद्योगिकी प्रबंधक कलायत ने किसानों को प्राकृतिक खेती के वैज्ञानिक और व्यावहारिक पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी और प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया। प्राकृतिक खेती के प्रमुख स्तंभों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जीवामृत मिट्टी में लाभकारी सूक्ष्मजीवों की संख्या बढ़ाकर पौधों को प्राकृतिक रूप से पोषण प्रदान करता है। कृषि विकास अधिकारी डॉ. नरेश नैन व कृषि वैज्ञानिक डॉ. जसबीर सिंह ने किसानों को खेत बचाओ अभियान के प्रति जागरूक करते हुए कहा कि स्वस्थ मिट्टी ही टिकाऊ खेती की सबसे बड़ी पूंजी है।
उन्होंने बताया कि अत्यधिक रासायनिक उर्वरकों व कीटनाशकों के प्रयोग से मिट्टी की उर्वरता शक्ति लगातार कम हो रही है जिसका सीधा प्रभाव फसल, पर्यावरण व मानव स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। इसका स्थायी समाधान प्राकृतिक खेती को अपनाना है। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वे फसल अवशेष न जलाएं। कार्यक्रम के अंत में कृषि पर्यवेक्षक डॉ. राकेश कुंडू की ओर से किसानों को विभाग की ओर से चलाई जा रही स्कीमों के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम में किसान फकीरचंद, बलवान, चांदी राम, होशियार सिंह, अमरजीत आदि किसानों ने कृषि विशेषज्ञों से बहुपयोगी प्रश्न पूछकर जानकारी हासिल की।
किसान गोष्ठी में शामिल किसान