संवाद न्यूज एजेंसी
गुहला-चीका। गुहला-चीका क्षेत्र में डीएपी खाद नहीं मिलने से किसानों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। वहीं, अन्य खाद के नाम पर कस्बे से लेकर गांवों में बैठे मुनाफाखोर किसानों को लूटने में लगे हैं। किसानों को रबी की फसल के लिए डीएपी खाद की जरूरत है, लेकिन बाजार में डीएपी उपलब्ध नहीं होने से किसान सुबह से शाम तक खाद विक्रेताओं के चक्कर लगा रहे हैं।
वहीं, किसान अन्य नामों के खाद को महंगे दामों में खरीदने को विवश हो रहे है। इधर, डीएपी खाद की किल्लत को देखते हुए कृषि विभाग मौन सादे हुए है। किसानों का कहना है खाद की विकट समस्या के बावजूद कृषि विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की, जिससे खाद विक्रेता अन्य खाद के नाम पर किसानों से लूट कर रहे हैं।
उधर, कृषि विभाग एसडीओ चीका डॉ. कंचन कुमारी ने बताया कि इस समय कुछ पैक्स समितियों व निजी दुकानों पर डीएपी की आने की संभावना है वह कब तक आएगा इसके बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता की खाद कल आएगा या आज। खाद के आते ही पैक्स समितियों पर डीएपी का वितरण कराया जाएगा। किसानों को डीएपी खाद की किल्लत नहीं होने दी जाएगी।
गौरतलब है कि कई दिनों से गुहला चीका में डीएपी खाद की किल्लत चल रही है। किसानों का आरोप है कि उनकी परेशानी को कोई नहीं समझ रहा है।
गुरजंट टटियाना ने बताया कि रबी के सीजन में बीते दिनों डीएपी आई थी, जो एक-दो दिन में बिक गई। इस समय सभी समितियों पर डीएपी का संकट चल रहा है। दुकानों पर नैनो डीएपी तो मौजूद है लेकिन यह किसी काम की नहीं लग रही है। मजबूरन बिना खाद के फसलों की बोआई करनी पड़ रही है। इससे फसल उत्पादन भी प्रभावित होगा।
भारती किसान यूनियन चढूनी के जिला आईटी सेल प्रभारी जरनैल जैली ने बताया कि क्षेत्र में एक लाख 28 हजार एकड़ भूमि कृषि योग्य है। उसके अनुसार किसान को डीएपी खाद की जरूरत है। अधिकारी और सरकार को किसानों की आवश्यकता का ध्यान रखना चाहिए।
गुहला-चीका क्षेत्र में बोआई के समय डीएपी नदारद होने से किसान परेशान हैं। रबी की मुख्य फसल गेहूं, सरसों, आलू बोने के लिए किसान सहकारी समितियों से लेकर प्राइवेट दुकानों का चक्कर लगाने को मजबूर हैं। भारतीय किसान यूनियन के जिला उपाध्यक्ष केवल सिंह संदहरेडी ने बताया कि वर्तमान में रबी सीजन में समितियों व बाजारों में डीएपी नदारद है। प्राइवेट दुकानों पर घटिया कंपनी की एनपीके 1300 रुपये बोरी मिल रही है।