डीसी ने बताया कि जिस तरह हर नागरिक की पहचान आधार कार्ड से होती है, उसी तरह यूनिक फार्मर आईडी किसानों की सटीक और पारदर्शी डिजिटल पहचान बनेगी। डीसी अपराजिता ने स्पष्ट किया कि यह पंजीकरण प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित और आधुनिक है। किसानों का पंजीकरण आधार कार्ड पर आधारित ओटीपी प्रमाणीकरण प्रक्रिया के जरिए किया जाता है। ओटीपी के जरिए किसान की पहचान और भूमि रिकॉर्ड का मिलान डिजिटल रूप से किया जाता है। किसानों की सुविधा के लिए गांवों और ब्लॉक स्तर पर राजस्व और कृषि विभाग की टीमें विशेष शिविर लगा रही हैं। इस डिजिटल आईडी के बन जाने से किसानों को काफी फायदे होंगे। पीएम-किसान, फसल बीमा और खाद-बीज पर मिलने वाली सब्सिडी सीधे खाते में और बिना किसी देरी के मिलेगी।बार-बार पटवारी या दफ्तरों के चक्कर काटकर भूमि दस्तावेज जमा करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सरकार के पास डेटा होने से आपदा या फसल नुकसान की स्थिति में मुआवजा वितरण अधिक पारदर्शी होगा। डीसी ने अपील करते हुए कहा कि सभी किसान अपने नजदीकी विशेष शिविर में जाकर अपना पंजीकरण अवश्य कराएं। यह न केवल आपकी पहचान को सुरक्षित करेगा, बल्कि भविष्य में मिलने वाली सभी सरकारी सुविधाओं का मुख्य आधार बनेगा। पंजीकरण के लिए जाते समय किसान अपना आधार कार्ड और आधार से लिंक्ड मोबाइल नंबर साथ जरूर रखें ताकि ओटीपी सत्यापन में कोई समस्या न आए। संवाद