नेशनल हाइवे नंबर 65 पर बनने वाले बाईपास के लिए घोषित मुआवजा राशि में बढ़ोतरी की मांग को लेकर दिए जा रहे धरने में रविवार को भारी संख्या में किसानों ने भाग लिया। कई गांवों के लोगों ने किसानों के धरने के समर्थन का ऐलान किया। साथ ही किसान संघर्ष समिति ने ऐलान किया है कि सीएम द्वारा दिए गए आश्वासन के बाद दी गई समय अवधि रविवार रात को समाप्त हो जाएगी। सोमवार को प्रशासन से सरकार का जवाब लेकर आगामी आंदोलन का ऐलान किया जाएगा। इसके साथ-साथ समिति ने प्रदेश भाजपा सरकार द्वारा जारी किए गए 4 दिसंबर 2014 के अध्यादेश को भी वापिस लेने की मांग की जाएगी।
भारतीय कियान यूनियन के बैनर तले तितरम मोड़ पर किसानों के अनिश्चितकालीन धरने की अध्यक्षता महंत रूद्र पुरी ने की। युवा किसान नेता जगबीर प्यौदा ने बताया कि किसानों की जमीन कम मुआवजा देकर सरकार जबरन भूमि अधिग्रहण करना चाहती है। सरकार की ओर कोई सकारात्मक कदम अब तक नहीं उठाया गया है और अब यह धरना एक विशाल आंदोलन का रूप ले चुका है। उन्होंने बताया कि प्रदेशाध्यक्ष गुरूनाम सिंह चढूनी की अध्यक्षता में एक प्रतिनिधि मंडल मुख्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर से मिला था और उन्होंने केंद्रीय नेता नितिन गडकरी से वार्तालाप कर दो दिनों में समस्या को हल करवाने का आश्वासन दिया था। लेकिन अब तक समस्या का कोई समाधान नहीं हुआ है।
रविवार को गांव संगरौली, मोणा, कौल, हाबड़ी, साकराखेड़ी, पाई, धनौदा, अंबरसर, कैलरम व शेरूखेड़ी के किसानों ने इस धरने का समर्थन दिया। इस अवसर पर भाकियू के प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम चढूनी, युवा किसान नेता जगबीर प्यौदा, प्रदेश महासचिव भूरा राम पबनावा, बिल्लू चंदलाना, जिला प्रधान सुभाष पूनिया, हरपाल संगरौली, कौल से महेंद्र सिंह, राम कुमार भाणा, प्रताप सिंह फरल, जोगा सिंह पूंडरी ब्लॉक से मौजूद रहे।
राज्य सरकार द्वारा जारी नोटिफिकेशन को रद्द करने की होगी मांग
वहीं आंदोलन की अगुवाई कर रहे गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि कांग्रेस एवं भाजपा दोनों ही जनता को गुमराह कर रही है। कांग्रेस जहां मार्केट रेट से दोगुना देने की बात कर रही है। जो असल में दोगुने की बजाए एक से दो गुणा तक का प्रावधान है। जिसमें शहर के निकट भूमि को एक गुणा के साथ-साथ 5 किलोमीटर के दायरे तक 10 प्रतिशत, इसके बाद अगले 5 किलोमीटर तक 20 प्रतिशत के हिसाब से 50 किलोमीटर तक दोगुना रेट देने की बात कही गई है। लेकिन भाजपा ने 4 दिसंबर 2014 को प्रदेश में अध्यादेश जारी कर इस बढ़े हुए रेट को भी देने का रास्ता बंद कर दिया। सीएम मनोहर लाल खट्टर इस अध्यादेश को पिछली सरकार द्वारा तैयार किए गए प्रस्ताव के आधार पर जारी करने की बात कह रहे हैं। पहले उन्होंने इसे वापिस लेने की हामी भरी थी। लेकिन मंगलवार को उन्होंने मुलाकात में इस बारे में कोई बात नहीं की। जिस कारण किसान यूनियन प्रदेश सरकार से मांग करती है कि इस अध्यादेश को वापिस लिया जाए।
इन गांवों की अधिग्रहीत की गई है जमीन
बाईपास के लिए तितरम, प्यौदा, हरसौला, नरड़, सेगा, ग्योंग, क्योड़क, उझाना व बेगबपुर की लगभग 200 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया गया है। इनके लिए 133 करोड़ रुपये की राशि जिला प्रशासन को मिली है। इसके लिए 8 गांवों में 27 से 40 लाख रुपये मुआवजा दिया जा रहा है। जबकि किसान इसके लिए 1 करोड़ रुपये से ज्यादा का मुआवजा मांग रहे हैं।
हो सकती है बड़े आंदोलन की शुरूआत:-कैथल एवं जींद की भूमि किसान आंदोलन के लिए जानी जबाती है। पूर्व में गांव कंचडेला, कैथल का गांव शिमला सहित कई जगहों पर किसानों ने मोर्चे लगाकर सरकार से बड़ी टक्कर ली है। लेकिन फिल्हाल सरकार द्वारा शायद इस आंदोलन को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। किसानों का कहना हैकि यदि सरकार ने सुनवाई नहीं की तो यहां से बड़े आंदोलन की भी शुरूआत हो सकती है।
धरनास्थल से कुछ ही दूरी पर गांव प्यौदा के किसान धर्म सिंह की आंदोलन में मौत हुई थी। जिसके चलते उनके नाम से धर्मसिंह गेट बनाया हुआ है।
डीसी केएम पांडुरंग का कहना है कि दो दिन की अवधि के अल्टीमेटम जैसी उनके पास कोई सूचना नहीं है। माननीय मख्यमंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया है। इसके अलावा भी किसानों को मुआवजे के संबंध में बताया गया है कि यदि वे अपील करें तो उनका मुआवजा बढ़ सकता है। जैसे भी सरकार के निर्देश होंगे, उस बारे में किसानों को अवगत करवा दिया जाएगा।