नेशनल हाइवे नंबर 65 पर बनने वाले गांव तितरम मोड़ से क्योड़क तक के
बाईपास के लिए अधिग्रहीत जमीन के मुआवजे में बढ़ोतरी के लिए किसान धरने पर
डटे हैं। शनिवार को भी धरना जारी रहा। किसानों की मांग है कि अधिग्रहीत
जमीन के लिए मुआवजा राशि बढ़ाकर 27 लाख से एक करोड़ रुपये की जाए। इस संबंध
में सीएम ने शुक्रवार को किसान प्रतिनिधियों से बातचीत कर केंद्रीय मंत्री
नितिन गडकरी से समस्या के समाधान का आश्वासन दिया था। इसके बाद से किसान
सरकार द्वारा की जाने वाली कार्रवाई के इंतजार में है।
किसान संघर्ष
समिति के सदस्य सुल्तान ग्योंग ने बताया कि मुख्यमंत्री को दिया गया समय भी
धीरे-धीरे समाप्त हो रहा है। जैसे जैसे समय गुजरता जा रहा है। वैसे वैसे
किसानों में रोष फैलता जा रहा है। कई ओर गांवों से किसान आंदोलन के समर्थन
के लिए आ रहे है। रविवार को प्रधान गुरनाम सिंह चढुनी आएंगे, उसके पश्चात
धरना स्थल पर पदाधिकारियों के साथ बैठक कर आगामी आंदोलन की घोषणा की जाएगी।
शनिवार को काफी संख्या में किसान दिन भर धरने पर डटे रहे।
वहीं, दूसरी
ओर जाट आरक्षण संघर्ष समिति के नेता धर्मपाल छौत के द्वारा शनिवार को धरने
पर बैठे किसानों संबोधित करते हुए कहा कि वे किसानों के साथ है। सोमवार 27
जुलाई को तितरम मोड़ पर जो धरना देने की घोषणा कि गई है। उसका इस धरने से
कोई वास्ता नहीं है। हमारी सरकार के साथ दूसरे किस्म की लड़ाई है। हम यह
धरना इस स्थान से कुछ हट कर या तो गांव तितरम के पास या फिर प्यौदा गेट के
पास धरना प्रदर्शन करेंगे। 27 जुलाई से जाट आरक्षण संघर्ष समिति का आंदोलन
भी शुरू हो जाएगा।