कैथल, कलायत, गुहला चीका। हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की 10वीं का परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद विद्यार्थी चहक उठे। सफलता की जानकारी मिलते ही विद्यार्थी अपने अध्यापकों को मिठाई खिलाने स्कूलों में पहुंचें। घर में भी मिठाई बांटकर खुशियां मनाईं। जिले में इस बार भी छात्राओं ने ही बाजी मारी है। इसमें किसान की बेटी दिव्या ने 493 अंक लेकर जिले में टॉप किया है। हिंदू कन्या स्कूल की छात्रा सिमरन वर्मा, चीका की परी, खरक पांडवा की अलीशा व आर्यन ने भी 492 अंक प्राप्त कर द्वितीय स्थान पाया है। इसके साथ ही कलायत की छात्रा लक्षिता 491 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहीं।
डॉक्टर बनना चाहती है दिव्या
नाम-दिव्या रानी
स्कूल- सरस्वती स्कूल पाई, कैथल।
लक्ष्य- डॉक्टर बनना।
सफलता का मंत्र- मोबाइल से दूरी व लगातार पढ़ाई।
पढ़ाई के घंटे- छह से आठ
हॉबी- पुस्तकें पढ़ना
जिले में टॉप पर रही पाई के सरस्वती स्कूल की छात्रा दिव्या एक डॉक्टर बनना चाहती है। दिव्या ने बताया कि वह अपना मार्ग दर्शक उनके अंकल सुनील को मानती है। वह तीन भाई-बहन हैं। इसमें उससे एक बड़ी बहन खुशी और एक छोटा भाई है। बड़ी बहन खुशी भी पिछले साल जिले में टॉपर रही थी। उसके पिता कृष्ण किसान है। माता कमलेश गृहिणी है। दिव्या ने 99 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं। इसमें उसके गणित व फिजिकल में 100-100 अंक है।
इंजीनियर बनना है सपना
फोटो नंबर-33
नाम-सिमरन वर्मा
स्कूल- हिंदू कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, कैथल।
लक्ष्य- इंजीनियर बनना।
सफलता का मंत्र- सोशल मीडिया से दूरी।
पढ़ाई के घंटे- आठ।
हॉबी-आर्ट एंड क्राफ्ट करना।
जिले में दूसरे स्थान पर रही हिंदू कन्या वरिष्ठ माध्यमित विद्यालय की छात्रा सिमरन वर्मा ने बताया कि वह इंजीनियर बनना चाहती है। उसे यह उम्मीद नहीं थी कि वह जिले में दूसरा स्थान प्राप्त कर पाएगी। उसे उम्मीद थी कि वे 95 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करेगी। उसके पिता राजेश एक निजी स्कूल में क्लर्क है। जबकि माता अंजू गृहिणी है। हिंदू स्कूल के मैनेजर अर्पित चौधरी ने बताया कि छात्रा सिमरन को नीट की तैयारी स्कूल प्रबंधन की तरफ से करवाई जाएगी।
सर्जन बनना है
नाम-अलीशा रानी
स्कूल-डीडीवाई स्कूल, खरक पांडवां कैथल।
लक्ष्य- सर्जन बनना।
सफलता का मंत्र-अपने विषयों पर ध्यान।
पढ़ाई के घंटे- आठ।
हॉबी- खो-खो खेलना।
खरक पांडवा की छात्रा अलिशा ने कहा कि उसका सपना सर्जन बनने का है। उसके माता सुमन- पिता यशपाल व दादा-दादी उसके प्रेरणास्रोत हैं। खेलने में उसका शौक था, जिला स्तर पर खो खो व रेस में पुरस्कार हासिल किए। दसवीं कक्षा में आते ही खेलों को अलविदा कह केवल पुस्तकों पर स्वयं को केंद्रित कर लिया।
नाम- आर्यन
स्कूल-डीडीवाई स्कूल, खरक पांडवां कैथल।
लक्ष्य- इंजीनियर बनना।
सफलता का मंत्र- स्कूल में मिला कार्य लगातार करना।
पढ़ाई के घंटे- सात।
हॉबी- शतरंज खेलना।
खरक पांडवा के आर्यन ने कहा कि उसका सपना इंजीनियर बन कर देश के लिए कुछ करने का है। आर्यन ने कहा कि पिता जयपाल खेती करते हैं और मां बिमला गृहिणी हैं। उससे बड़ी तीन बहनें हैं जिनमें से दो ने 95 प्रतिशत व एक ने 96 प्रतिशत अंक हासिल किए थे। पिता से उसका वायदा था कि वह बहनों से अधिक नंबर लाने का प्रयास करेगा। वह इसमें सफल रहा और 98.4 प्रतिशत अंक हासिल किए। आर्यन का कहना है कि पोजिशन हासिल करने के लिए किताबी कीड़ा बनने की आवश्यकता नहीं। केवल विषय पर ध्यान केंद्रित करना जरूरी है।
नाम- परी
स्कूल-ज्ञान दीप स्कूल चीका, कैथल।
लक्ष्य- इंजीनियर बनना।
सफलता का मंत्र-ट्यूशन का सहारा नहीं लिया।
पढ़ाई के घंटे- आठ।
हॉबी- पुस्तकें पढ़ना व खेल खेलना।
मध्यवर्गीय परिवार के राकेश कुमार की बेटी परी ने 10वीं कक्षा के वार्षिक परिणाम में 98.4 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं। परी स्थानीय ज्ञान दीप स्कूल चीका की छात्रा है। उसने बिना कोई ट्यूशन लिए कुल 500 में से 492 अंक हासिल कर टॉप थ्री का यह मुकाम हासिल किया। पिता राकेश कुमार और माता ममता रानी, बेटी का परीक्षा परिणाम देख फूले नहीं समा रहे हैं। परी इंजीनियर बनना चाहती है। परी ने इस कामयाबी का श्रेय माता-पिता और गुरुजनों को दिया। परी ने बताया कि उसने इससे पहले की सभी कक्षाएं भी अव्वल श्रेणी में उत्तीर्ण की है और स्कूल समय के अलावा रोजाना सात घंटे नियमित रूप से घर पर पढ़ाई की। उसने आज तक कभी भी ट्यूशन का सहारा नहीं लिया। परी का बड़ी बहन तन्वी कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय कुरुक्षेत्र में पढ़ाई कर रही है, जबकि एक छोटी बहन भी प्राइमरी स्कूल में पढ़ाई कर रही है।
नाम- लक्षिता स्कूल-एसडी स्कूल, कलायत, कैथल।
लक्ष्य- सीबीआई अधिकारी बनना।
सफलता का मंत्र- मोबाइल फोन का प्रयोग न करना।
पढ़ाई के घंटे- छह।
हॉबी- खेलना।
जिला स्तर पर तीसरे स्थान पर रही गांव कुराड की छात्रा लक्षिता अपने जीवन में सीबीआई अफसर बन कर भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना चाहती है। लक्षिता एसडी स्कूल की छात्रा है। उसके प्रेरणा के स्त्रोत उसके माता आशा व पिता सुभाष हैं। पिता अतिथि अध्यापक हैं और मां एमए बीएड और एचटेट पास है। अपनी मां की शिक्षा से प्रेरणा लेकर ही लक्षिता ने अपना भविष्य तय किया है।