चीका मंडी में धान को सुखाने का प्रयास करते किसान। संवाद
- फोटो : सड़क पर उतर यातायात व्यवस्था संभालती एनसीसी कैडे्टस। स्त्रोत: पुलिस
गुहला चीका। दो दिन पहले रविवार की बारिश में भीगा लाखों क्विंटल धान अब किसान हाथों से सुखाने में लगे हैं। सुबह से ही किसान मंडी में अपनी भीगी हुई ढेरियों के पास बैठे हैं। किसान फावड़े और हाथों व जेसीबी मशीन से भीगे हुए धान को पलट-पलट कर सूखा रहे हैं। भीगा हुआ धान काला पड़ने लगा है और उसमें से बदबू भी आने लगी है। किसान गुरमेल सिंह ने कहा कि छह महीने की मेहनत बारिश में डूब गई। आढ़ती अब भीगा हुआ धान लेने से मना कर रहे हैं। कह रहे हैं सूखा कर लाओ। मजबूरी में खुद मंडी में ही धान सूखा रहे हैं। दो दिन धूप लगी तो शायद धान बच जाए, नहीं तो सारा खराब हो जाएगा। किसानों का कहना है कि अगर सरकार इस भीगे हुए धान को भी एमएसपी पर खरीद ले तो उनका नुकसान कुछ कम हो जाएगा।
चीका मंडी में धान को सुखाने का प्रयास करते किसान। संवाद- फोटो : सड़क पर उतर यातायात व्यवस्था संभालती एनसीसी कैडे्टस। स्त्रोत: पुलिस