कैथल। हरियाणा सरकार कोस्ट एंड एग्रीकल्चर कल्चर कोस्ट कमीशन की अनुमति के बिना न्यूनतम समर्थन मूल्य में कमी नहीं कर सकती। पहले कमीशन इस पर फैसला लेता है। बाद में इसे केंद्रीय मंत्री मंडल द्वारा मंजूरी दी जाती है। लेकिन आज तक के इतिहास में हरियाणा सरकार का पहला ऐसा सरकारी फैसला देखा है, जिसमें किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य में 86 रुपये प्रति क्विंटल की कमी के साथ खरीद की खुली छूट देकर लूटने का अवसर प्रदान कर दिया गया।
यह आरोप अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के मीडिया प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने लगाया। अपने आवास पर मीडिया से बातचीत में सुरजेवाला ने कहा कि एक ओर तो सरकार ने नमी के नाम पर 17 से लेकर 22 प्रतिशत तक खरीद में जो छूट दी है, उसमें प्रत्येक प्रतिशत के हिसाब से 1 किलो धान की कटौती की मंजूरी दी दे। इस तरह से यह 5 किलो में 75 रुपये बनती है। दूसरा इस धान को सुखाने में जो खर्च आएगा, उसकी मजदूरी का खर्च भी किसान से वसूलने का फरमान जारी किया। जो प्रति किलो 2 रुपये 20 पैसे के हिसाब से 11 रुपये बनता है। जिस तरह से किसान को न्यूनतम समर्थन मूल्य में से 86 रुपये प्रति क्विंटल की कटौती का फरमान 5 अक्तूबर को किसान के हित की बात कहते हुए जारी कर दिया गया।
जो सरकार की अनुभवहीनता, नकारापन व किसानों से सरकारी लूट की नीति को दर्शाता है। दूसरा जो धान 1509 या 1121 चार हजार से लेकर पांच हजार रुपये प्रति क्विंटल तक बिका था। वह पिछले तीन सीजन से 1600 से 1800 रुपये प्रति क्विंटल तक पिट रहा है। जो किसानों के साथ दोहरी मार है। प्रदेश में खट्टर सरकार व केंद्र में मोदी सरकार किसानों की लूट की योजनाएं लागू कर तानाशाही रवैया अपनाए हुए हैं। हरियाणा में सरकार द्वारा यह अपराध किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार इस फैसले को वापिस ले। उन्होंने कहा कि सर्जीकल स्ट्राईक सहित भारतीय सेना के हर कदम का कांग्रेस पार्टी स्वागत करती है। लेकिन सैनिकों की बहादुरी पर भाजपा द्वारा की जा रही राजनीति निंदनीय है।