जल्द अमीर बनने की लालसा में एक टेलर की दुकान चला रहे युवक को शराब पीते हुए नकली नोट बनाने की करतूत सूझी और यू-ट्यूब की मदद से लाखों रुपये की नकली करेंसी बाजार में उतार दी। कुख्यात आरोपी अपनी योजना में सफल भी हो रहा था। यदि वह पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ता। फिल्हाल पुलिस ने मुख्य आरोपी सहित छह को काबू कर लिया है। दो से दो दिन के रिमांड के दौरान कई अहम खुलासे होने की उम्मीद है।
पुलिस द्वारा किए गए खुलासे के अनुसार संजय निवासी जसवंती ने पूछताछ के दौरान कबूला कि उसकी गांव क्योड़क में वीआईपी टेलर्स के नाम से दर्जी की दुकान चला रहे सुखविंद्र निवासी रसुलपुर मांडी के साथ कई वर्षों से दोस्ती है। वर्ष 2019 के माह जून में वह अपने दोस्त सुखविंद्र के साथ उसकी दुकान पर शराब पी रहा था, जिसके दौरान उनके दिमाग में नकली नोट बनाकर बाजार में चलाने की योजना का तानाबाना बना। जिसके तहत दोनों द्वारा यू-ट्यूब की मार्फत नकली नोट बनाने का तरीका देखा गया। घटना के कई दिन बाद उनकी मुलाकात दिनेश क्योड़क से हुई, जिसको नकली नोटों की बाजार में खपत करने के लिए अपनी योजना में शामिल कर लिया।
पहली बार में बनाए थे चार नोट, चल निकले तो गोरखधंधे को आगे बढ़ाया: सुखविंद्र द्वारा कलर प्रिंटर व कंप्यूटर की मार्फत संजू के मकान पर सैंपल के तौर पर 500-500 रुपये के नोटों की फोटो कॉपी करके 4 नकली नोट तैयार किए गए। जो उनके साथी दिनेश की मार्फत जसवीर, अनिल तथा विजय के द्वारा मार्केट में चला दिए। इसके बाद उनका गोरखधंधा चल निकला और देखते ही देखते लाखों रुपये की नकली करेंसी बाजार में उतार दी।
500, 200 व 100 रुपये के नोट छापे: दोनों आरोपियों द्वारा आपराधिक षडयंत्र के तहत बड़े पैमाने पर 500-500 रुपये तथा कुछ 200-200 व 100-100 रुपये के जाली नोट तैयार किए, जिन्हें उनके साथी दिनेश को 30 हजार रुपये असली करेंसी के बदले में एक लाख रुपये की जाली करेंसी देने की डील हुई। इस दौरान आरोपी दिनेश अब तक उनसे 12 लाख रुपये की जाली करेंसी हासिल करके उनको 7 हजार रुपये के असल करेंसी नोट दे चुका था, जबकि शेष राशि नकली करेंसी बाजार में चलने उपरांत देने का इकरार किया गया था।