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धूमधाम से संपन्न हुआ पूणमा का मासिक मेला

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कलायत। कड़ाके की ठंड के बीच मार्गशीष माह की पूर्णिमा पर रविवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पवित्र सरोवर में आस्था की डुबकी लगाई। पुजारी श्यामलाल गौतम ने पूर्णिमा के महत्व को बताने के साथ ही भगवान श्रीकपिल मुनि सहित मां कात्यायनी के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कथा वाचन करते हुए गौतम ने कहा कि इस पूर्णिमा को मन मोक्ष पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने कहा कि पूर्णिमा के दिन श्री कपिल मुनि के पौराणिक तीर्थ में स्नान करने से वैसे ही पुण्य की प्राप्ति होती है, जैसे गंगासागर में स्नान करने से मिलती है। उन्होंने कहा कि पूर्णिमा का व्रत पूर्ण व्रत होता है, जो कि सुबह से लेकर सायंकाल तक रखा जाता है। पूर्णिमा का व्रत रख कर कथा सुनने से न केवल हर मनोकामना पूर्ण होती है, बल्कि मोक्ष की प्राप्ति भी होती है। गौतम ने कहा कि पूर्णिमा के दिन अन्न और धन का दान करना भी उत्तम माना जाता है। कपिल मुनि जी का तीर्थ वह पौराणिक तीर्थ है, जहां प्राचीन काल में राजा शालीवान को श्राप से मुक्ति मिली थी। भगवान कपिल ने इसी स्थान पर अपनी माता देवहुति को सांख्य शास्त्र का ज्ञान दिया था। मंदिर में पूजा के बाद महिलाओं और बच्चों ने मंदिर के मुख्य द्वार के पास लगी अस्थायी दुकानों से खरीदारी भी की।
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