संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। गांव बाबा लदाना स्थित बाबा राजपुरी डेरे में तीन दिवसीय भव्य मेले का 12 अक्तूबर से आगाज हो जाएगा। दशहरे को शुरू होने वाला यह मेला एकादशी व द्वादशी को भी जारी रहेगा। इसके लिए डेरा प्रबंधन और जिला प्रशासन की ओर से तैयारी की गई हैं। मेले के दौरान बाबा राजपुरी के मंदिर में दूध, घी, मक्खन, फल और प्रसाद चढ़ाकर धन-धान्य और पशुधन में वृद्धि की कामना करते हैं।
गांव के सरपंच गुरनाम सिंह, पंच जसबीर जस्सी, विक्की प्रजापति, रमन, कर्मवीर व संजू ने बताया कि दशहरे के दिन सुबह हवन, डेरे में जाल के प्राचीन पेड़ पर ध्वज चढ़ाने व दादा खेड़े पर प्रसाद चढ़ाने के साथ मेले व पूजा-पाठ का कार्य शुरू हो जाएगा। तीन दिवसीय मेले में लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। सभी तैयारी पूरी कर ली गई हैं।
उन्होंने बताया कि मेले के दौरान हरियाणा सहित विभिन्न प्रदेशों से साधू समाज भी डेरे में पहुंचेगा। उनके रहन-सहन और भोजन की व्यवस्था डेरे की ओर से की जाएगी। इसके अलावा श्रद्धालुओं के लिए भंडारे की सेवा भी लगातार करवाई जाएगी। मेले के दौरान कुश्ती दंगल भी करवाया जाएगा।
उधर, मेला स्थल पर मिठाई और खिलौनों की दुकानें भी मेले में लगनी शुरू हो गई हैं। स्थानीय स्तर पर मेले की बागडोर संभालने के लिए ग्राम स्तर पर सेवादार लगाए जाएंगे। गांव बाबा लदाना सहित आसपास के गांवों से सेवादार व युवा मंदिर में व्यवस्था को संभालेंगे।
ग्रामीणों ने बताया कि गांव बाबा लदाना स्थित बाबा राजपुरी डेरे में दशहरे (दशमी) , एकादशी व द्वादशी को लगने वाले विशाल मेले में हरियाणा सहित आसपास के प्रदेशों से श्रद्धालु पूजा-पाठ के लिए पहुंचेंगे। मान्यता है कि डेरे का इतिहास 550 साल से भी अधिक पुराना है। किंवदंति के अनुसार, 550 साल पहले गांव में एक बच्चे का जन्म हुआ, जो शैशव काल से ही महान योगी की तरह थे। बाद में वे बाबा राजपुरी के नाम से प्रसिद्ध हुए। यह डेरा स्वामी विवेकानंद के गुरु रामकृष्ण परमहंस और उनके गुरु महंत तोतापुरी महाराज की तपोस्थली रहा है। यहां महंत तोतापुरी की समाधि भी है।
ग्रामीणों के मुताबिक, माता हिंगलाज अष्टमी की रात को डेरे में बने मंदिर में आती हैं और वर्षों पुराने जाल के पेड़ पर धागा बांधकर जाती हैं।
दशहरा के दिन जाल के पेड़ पर बाबा राजपुरी और माता हिंगलाज की पूजा कर ध्वजा चढ़ाई जाती है। उसके साथ ही शंख बजाकर मेले का उद्घोष किया जाता है। बाबा राजपुरी के देश भर में करीब 365 मठ हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि पहले दिन पूजा-पाठ के लिए पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या अपेक्षाकृत कम रहती है, लेकिन एकादशी को सबसे अधिक संख्या में श्रद्धालु बाबा की पूजा करने आते हैं। बाबा राजपुरी के मंदिर में दूध, घी, मक्खन, फल और प्रसाद चढ़ाकर धन-धान्य और पशुधन में वृद्धि की कामना करते हैं।
एकादशी के दिन सबसे ज्यादा श्रद्धालु पूजा-पाठ के लिए इसलिए आते हैं, क्योंकि सामान्य व प्रत्येक एकादशी को बाबा राजपुरी के डेरे में पूजा करने का विशेष महत्व होता है। हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, राजस्थान, उतराखंड, यूपी व हिमाचल सहित अन्य स्थानों से श्रद्धालु और साधु पूजा-पाठ के लिए पहुंचते हैं।