संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। विश्व दृष्टि दिवस वीरवार को मनाया जाना है। इस दिन जिला नागरिक अस्पताल में विशेष कार्यक्रम आयोजित कर यहां आने वाले मरीजों की जांच कर उन्हें आंखों से संबंधित बीमारियों से बचाव की जानकारी दी जाएगी।
गौरतलब है कि कोरोना संक्रमण के बाद मोबाइल का काफी अधिक चलन बढ़ा है। इसके पीछे ऑनलाइन क्लास, कोचिंग के साथ मोबाइल पर स्क्रीन टाइम बढ़ना है। यह युवाओं के साथ बच्चों की आंखें को कमजोर कर रहा है। इसका नतीजा यह है कि पांच से 14 साल तक के बच्चों में आंखों से संबंधित अधिक बीमारियां आ रही हैं। इसके चलते नेत्र रोष विशेषज्ञ के वार्ड में आ रही 200 की ओपीडी में से प्रतिदिन 50 से अधिक की ओपीडी इस आयु वर्ग की है।
करीब 60 प्रतिशत तक बच्चों में ड्राइनेस की समस्या ः जिला नागरिक अस्पताल में कार्यरत नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. कविता गोयल ने बताया कि मोबाइल अधिक देर तक और पास से देखने के कारण करीब 60 प्रतिशत तक बच्चों में ड्राइनेस की समस्या है।
अधिक बीमारियों के चलते एलर्जी, सिर में दर्द, जी मचलाना और माइग्रेन की समस्या बढ़ी है। गोयल ने बताया कि ड्राइनेस के कारण पहले दूर की नजर की समस्या बनती है। इसके कारण पास की नजर भी कमजोर हो रही है। इसके साथ ही एलर्जी, सिर में दर्द, जी मचलाना और माइग्रेन की समस्या है।
बीमारियों से ऐसे करें बचाव
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. कविता गोयल ने बताया कि लगातार मोबाइल के प्रयोग से आंखों की बीमारियों से बचा जा सकता है। इसके साथ ही बार-बार आंखों को पानी से धोएं। हो सके तो बच्चों को मोबाइल की स्क्रीन पर कम से कम समय बिताएं। साथ ही बच्चों को एलईडी की स्क्रीन पर ही देखने दें।
मायोपिया को नजरअंदाज करने से खतरा
स्क्रीन पर अधिक समय गुजारने से पुतली का साइज बढ़ जाता है। इससे मायोपिया की समस्या होती है। आंख के पर्दे में मायोपिया होने पर छेद हो सकता है या पर्दा कमजोर हो सकता है। मायोपिया ज्यादा समय तक रहने से आंखों में काला या सफेद मोतिया हो सकता है। इससे बचना है तो खाने-पीने में हरी सब्जियां, मौसमी फल, जूस ड्राई फ्रूट अधिक दें। शुरू में यदि मायोपिया हो तो आंखों की एक्सरसाइज से ठीक हो सकता है।