संवाद न्यूज एजेंसी
ढांड। सुचारु रूप से सरकारी खरीद शुरू न होने और राइस मिलरों की हड़ताल की वजह से किसान परेशान हो रहे हैं। राइस मिलर अपने हितों के लिए मांगों को लेकर अड़े हुए। इस समस्या का समाधान निकालने के लिए कवायद भी चल रही है पर नतीजा सिफर है। खरीद एजेंसियों ने धान खरीद के लिए हामी भर ली पर किसानों को भुगतान देने के लिए लिखित में देने को तैयार नहीं है।
न्यूनतम समर्थन मूल्य पर पीआर धान की खरीद के मुद्दे पर अनाज मंडी एसोसिएशन ने सरकारी खरीद एजेंसियों व राइस मिलरों को बुलाकर बैठक की। इसमें हैफेड एवं डीएफएससी खरीद एजेंसियों के अधिकारी व ढांड राइस मिलर्स एसोसिएशन के प्रधान गुलाब सिंह पाबला सहित कई राइस मिलरों ने भाग लिया।
मंडी प्रधान नरेश सहारण ने सरकार के 27 सितंबर से पीआर धान खरीद शुरू करने के पत्र का हवाला देते हुए कहा कि ढांड मंडी भी पीआर धान की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की जाए।
खरीद एजेंसियों के अधिकारियों ने मंडी एसोसिएशन के आग्रह को मानते हुए सरकारी मानकों पर खरा उतरने वाली धान को खरीद करने की बात कही। प्रधान ने खरीद एजेंसियों को कहा कि आप सरकार मानकों पर खरा उतरने वाली धान की खरीद कर लोगे, लेकिन सरकारी नियमानुसार उसका समय पर उठान व किसानों के खाते में भुगतान करने की जिम्मेदारी भी लिखित में देनी पड़ेगी। यहां आकर पेंच फंस गया और अधिकारियों ने कहा कि हम खरीद करने तक सीमित हैं, उठान करना तो राइस मिलरों का काम है।
उन्होंने कहा कि जब तक राइस मिलर हड़ताल समाप्त नही करेंगे तब तक खरीदे गए माल का उठान संभव नही है। प्रधान ने कहा कि सरकार की नीति के अनुसार जब तक खरीदे गए माल का उठान होकर ऑनलाइन निकास द्वार नहीं कटता जब तक किसान के खाते में भुगतान नहीं होगा। इससे तो किसानों को भुगतान के लिए महीनों तक इंतजार करना पड़ेगा।
मंडी एसोसिएशन ने बार-बार खरीद एजेंसियों को कहा कि आप खरीद के साथ उठान भी करो ताकि किसानों व आढ़तियों को मंडी में जाम की स्थिति का सामना ना करना पड़े,लेकिन बात नही बन सकी।
हैफेड खरीद एजेंसी के इंस्पेक्टर निरंजन ने कहा कि हम तो मंडी से धान खरीदने के लिए तैयार है, लेकिन राइस मिलरों के हड़ताल पर होने के चलते उन्होंने अभी पंजीकरण नही करवाया है। सरकार की नीति के अनुसार बिना पंजीकरण के किसी भी राइस मिलरों को एक भी दाना धान का नही दिया जाएगा। हमारे पास माल को स्टोर करने के लिए जगह नही है। जब तक मंडी से माल का उठान नहीं होगा तक तक किसानों को भुगतान नहीं किया जा सकता।
ढांड राइस मिलर्स एसोसिएशन के प्रधान गुलाब सिंह पाबला का कहना है कि हमें अफसोस है कि सरकार की गलत नीतियों के चलते प्रदेश की मंडियां धान से अटी हुई है।
उन्होंने कहा कि किसान व आढ़ती परेशान हैं लेकिन हम क्या कर सकते है क्योंकि हमारी सरकार से कुछ मांगे है और सरकार हमारी बात ही नही सुन रही है। सरकार की नीति के अनुसार यदि हम काम करते हैं तो हमें घाटा उठाना पड़ता है। जब तक सरकार हमारी मांगे नही मान लेती हम काम करने के लिए तैयार नही होंगे।