नगर पालिका अधिनियम की धारा 25 के तहत बैठक बुलाए जाने की लड़ाई अब काफी रोचक हो चली है। शुक्रवार को भी ईओ नगर परिषद के छुट्टी पर होने के कारण बैठक के लिए अधिकारियों की ओर से एजेंडा जारी नहीं हो पाया। अब केवल सोमवार का अंतिम कार्यदिवस नगर पार्षदों के कार्यकाल का बचा है। इससे पूर्व ही कार्यकारी चेयरमैन डॉ. पवन थरेजा ने खुद ही एजेंडा जारी कर दिया। जिसमें उन्होंने रविवार बाद दोपहर तीन बजे की बैठक निर्धारित कर सभी पार्षदों को सूचना भेज दी। जिसमें डोर टू डोर के टेंडर को रद्द करने का ही एजेंडा सबसे पहले रख दिया गया है। जबकि बैठक के लिए पूर्व में दिए गए नोटिस में इस टेंडर पर विचार करने की बात कही गई थी। इसके अलावा कई अन्य एजेंडा भी बैठक में चर्चा के लिए रखे गए हैं। दूसरी ओर कई वर्तमान व पूर्व पार्षदों ने इस तरह से बैठक के लिए एजेंडा जारी करने को अवैध करार दिया है।
कार्यकारी चेयरमैन डॉ. पवन थरेजा ने कहा कि कई कारणों से अधिकारियों की ओर से बैठक का एजेंडा जारी नहीं किया गया। जिस कारण एक्ट की धारा 25 के तहत उन्होंने खुद ही एजेंडा जारी कर पार्षदों, विधायक व सांसद सहित अधिकारियों को एजेंडा भेज दिया है और रविवार दोपहर बाद तीन बजे बैठक निर्धारित की है। जो अधिकारी या कर्मचारी बैठक में नहीं पहुंचेगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
पार्षद मोहन लाल शर्मा का कहना है कि अधिकारियों ने कोविड का बहाना बनाकर बैठक नहीं बुलाई। अब कार्यकारी प्रधान ने अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए एक्ट के अनुसार रविवार को तीन बजे बुलाया है। जिसके लिए एजेंडा जारी कर दिया गया है। सभी पार्षदों सहित विधायक, सांसद व संबंधित अधिकारियों को एजेंडा भेज दिया गया है। प्रधान ने निर्देश जारी किए हैं कि जो अधिकारी बैठक में नहीं आएगा, उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। अकाउंट ऑफिसर साहब राम को आदेश जारी किए हैं कि वह प्रोसिडिंग बुक लेकर पहुंचे।
इसी प्रकार से पार्षद संजय भौरिया ने कहा कि पार्षदों की मांग अनुसार चेयरमैन ने बैठक बुलाई है। यह बैठक शांतिपूर्वक तरीके से हो और सभी पार्षद इसमें पहुंच कर इसे सफल बनाएं। साथ ही शहर में डोर टू डोर सफाई के नाम पर हो रहे फिजूल खर्च को बचाया जा सके।
कई बार पार्षद रह चुके एवं इस समय पार्षद प्रतिनिधि एडवोकेट धर्मबीर भोला ने कहा कि हरियाणा म्यूनिसिवल अधिनियम 1973 के, हरियाणा म्युनिसिपल बिजनेस बाइलॉज 1981 के रुल 4 व अधिनियम की धारा 31-1 के अनुसार बैठक का लिखित नोटिस सचिव द्वारा हस्ताक्षर किए जाने के बाद सभी पार्षदों को भेजे जाने का प्रावधान है। नगर पालिका अधिनियम 1973 में कहीं भी प्रावधान नहीं है कि कोई भी उप-प्रधान खछुद को कार्यकारी प्रधान लिखेगा। अधिनियम की धारा 25 में भी उप-प्रधान शब्द लिखा हुआ है। धर्मबीर भोला ने कहा कि एजेंडे के लिए जो पत्र जारी किया गया है, वह अवैध है। बैठक की पूरी कार्रवाई भी केवल सचिव या कार्यकारी अधिकारी द्वारा लिखे जाने का प्रावधान है। यदि कार्यकारी अधिकारी या कोई अन्य कर्मचारी बैठक में नहीं होंगे तो उस बैठक की कार्रवाई कौन लिखेगा और क्या वैद्यता रहेगी।
पूर्वाग्रह से ग्रसित एजेंडा है
पूर्व चेयरमैन यशपाल प्रजापति ने कहा कि यदि बैठक बुलानी ही है तो भ्रष्टाचार के मुद्दे पर क्यों नहीं बुलाई गई। सिटी स्कवॉयर के भ्रष्टाचार के मुद्दे पर बैठक बुलानी चाहिए थी। पहले बैठक बुलाने के लिए दिए गए एजेंडे में डोर टू डोर के टेंडर पर विचार करने की बात कही गई, अब जो सोशल मीडिया पर कार्यकारी प्रधान के माध्यम से भेजा गया एजेंडा दिखा है, उसमें सीधा इस टेंडर को रद्द करने पर विचार करने की बात कही गई है। जिससे स्पष्ट है कि यह एजेंडा पूर्वाग्रह से ग्रसित है। क्योंकि ठेकेदार बलबीर ने चेयरमैन के खिलाफ विजिलेंस में शिकायत दी है, उसी का बदला लेने के लिए इस तरह की बैठक का प्रयास हो रहा है। जो गलत है। इसी प्रकार से पार्षद ज्योति सैनी का कहना है कि डोर टू डोर का काम संतोषजनक है। जिस तरह से एजेंडा जारी किया गया है, वह भी नियमानुसार नहीं है।
एजेंडे के बारे में जानकारी नहीं : बलवीर
उधर, ईओ नगर परिषद बलवीर सिंह ने कहा कि वे अवकाश पर हैं। उन्हें एजेंडे के बारे सूचना नहीं है। न ही उन्हें रविवार की बैठक बुलाए जाने के संबंध में आधिकारिक जानकारी है। तो बैठक में आने या न आने बारे वे क्या बता सकते हैं।